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September 12 2026 08:11 am

Major change in US H-1B visa : अब फीस 88 लाख, भारतीयों के लिए मुश्किल बढ़ी

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India News Live,Digital Desk : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीज़ा नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इस बदलाव के तहत अब H-1B वीज़ा के लिए कंपनियों को करीब 88 लाख रुपये देना होंगे। यह कदम उन भारतीयों के लिए चिंता बढ़ा सकता है जो अमेरिका जाने का सपना देखते हैं, क्योंकि H-1B वीज़ा भारतीय पेशेवरों के बीच सबसे लोकप्रिय विकल्प रहा है।

H-1B वीज़ा शुल्क में बढ़ोतरी

पहले कंपनियों को H-1B वीज़ा के लिए पंजीकरण शुल्क 215 डॉलर (लगभग 1,900 रुपये) और फॉर्म शुल्क 780 डॉलर (लगभग 68,000 रुपये) देना पड़ता था। अब नए नियम के अनुसार हर आवेदन पर 1,00,000 डॉलर (लगभग 88 लाख रुपये) देने होंगे। इतना बड़ा शुल्क छोटे व्यवसाय और स्टार्टअप के लिए मुश्किल खड़ा कर सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि अब केवल उच्च-कुशल पेशेवरों के लिए ही आवेदन किया जाएगा, और विदेशी कर्मचारियों की संख्या घट सकती है।

H-1B वीज़ा क्या है?

H-1B वीज़ा उन पेशेवरों के लिए होता है जो अमेरिका में काम करना चाहते हैं। यह वीज़ा आमतौर पर 6 साल तक वैध रहता है। वीज़ा धारक अपने जीवनसाथी और बच्चों को भी अमेरिका ला सकते हैं और भविष्य में अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं।

शुल्क बढ़ने का कारण

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य केवल उच्च-कुशल कर्मचारियों को अमेरिका लाना है। इससे अमेरिकी नागरिकों की नौकरियाँ सुरक्षित रहेंगी और कंपनियों को प्रशिक्षित विदेशी कर्मचारियों पर निर्भरता कम होगी।

विदेशी कर्मचारियों को प्रशिक्षण से रोकने का प्रयास

अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक के अनुसार, बड़ी कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने से रोकना इस फैसले का मुख्य मकसद है। अगर कोई कंपनी किसी विदेशी कर्मचारी को प्रशिक्षित करना चाहती है, तो उसे 1,00,000 डॉलर भुगतान करना होगा। इससे कंपनियाँ अमेरिकी नागरिकों और अमेरिका में स्नातक करने वाले युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए प्रेरित होंगी।

भारतीयों पर इसका असर

भारतीय H-1B वीज़ा के सबसे बड़े लाभार्थी रहे हैं। 2020-2023 के आंकड़ों के अनुसार, कुल H-1B वीज़ा में 71% भारतीयों को दिए गए। दूसरी संख्या में चिली 11.7% के साथ है। अब फीस बढ़ने के बाद भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका जाना और महंगा और चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। जून 2025 तक अमेज़न ने 12,000, जबकि माइक्रोसॉफ्ट और मेटा ने लगभग 5,000-5,000 वीज़ा मंज़ूर किए हैं।