Magh Mela 2026 : धीमी रफ्तार से पिछड़ती तैयारियाँ, डेडलाइन पर संकट गहराया
India News Live,Digital Desk : माघ मेला 2026 की तैयारियों में इस बार काफी सुस्ती देखी जा रही है। अनुभवी और लंबे समय से मेला प्रबंधन संभाल रहे अधिकारी होने के बावजूद काम तय रफ्तार से नहीं बढ़ पा रहा है। स्थिति यह है कि अब तक आधा काम भी पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में 15 दिसंबर तक निर्धारित 60% कार्य पूरा करना मेला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
3 जनवरी 2026 से शुरू होगा माघ मेला
हर साल की तरह इस बार भी मेला 3 जनवरी से शुरू होने जा रहा है। लेकिन कल्पवासी 30-31 दिसंबर से ही आने लगते हैं, क्योंकि उन्हें अपने शिविर व्यवस्थित करने में तीन से चार दिन लग जाते हैं। बड़े-बड़े संतों के शिविरों की तैयारी में 15 से 20 दिन का समय लगता है, इसलिए वे भी पहले पहुंचते हैं।
तैयारियों में भारी देरी, बाढ़ को बहाना बताया जा रहा
इस बार मेला निर्माण कार्य काफी पिछड़ गया है। जबकि अधिकारी और कर्मचारी वर्षों से यही जिम्मेदारी निभाते आ रहे हैं। कई तो सेवानिवृत्ति के बाद भी काम में लगे हैं। इसके बावजूद प्रगति बेहद धीमी है। इस बार भी देरी का कारण बाढ़ के पानी को बताया जा रहा है, जबकि यह बहाना हर साल की तरह दोहराया जा रहा है।
सेक्टरों में काम की स्थिति चिंताजनक
सेक्टर 4, 5 और 6 में तो 30–35% काम भी पूरा नहीं हो पाया है। महावीर मार्ग, काली मार्ग और अक्षयवट मार्ग का निर्माण अभी तक शुरू भी नहीं हो सका है। लोअर संगम मार्ग की स्थिति भी अधूरी है। सेक्टर 1 और 2 में संगम अपर मार्ग के लिए जमीन का चिन्हांकन तक नहीं किया गया है। पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की हालत भी लगभग यही है।
कई सेक्टरों में बिजली के पोल तक नहीं लगाए गए
कई जगहों पर बिजली के पोल जमीन पर ही पड़े हुए हैं। पहले गड्ढे खोदे जाएंगे, फिर पोल लगाए जाएंगे, उसके बाद तार बिछाया जाएगा और अंत में एलईडी फिटिंग होगी। जहां पोल लगाए जा चुके हैं, वहां तार डालने का काम नहीं हुआ है। जल निगम की पाइपलाइन बिछाने की रफ्तार भी बेहद धीमी है।
सेक्टर 4, 5 और 6 में पाइपलाइन के गड्ढे ही खोदे जा रहे
सबसे खराब हालात सेक्टर 4, 5 और 6 में हैं। यहां पाइपलाइन डालने के लिए गड्ढे अभी भी खुदवाए जा रहे हैं। दूसरी ओर मेला प्रशासन ने जमीन आवंटन के बाद सुविधा पर्ची का वितरण शुरू कर दिया है। ऐसे में संत-महात्मा सुविधा पर्ची लेकर घूम रहे हैं, लेकिन अपने शिविर लगाने की स्थिति में बिल्कुल नहीं हैं क्योंकि उनके सेक्टर में काम शुरू ही नहीं हुआ है। इसी वजह से वे अधिकारियों से सवाल कर रहे हैं कि अधूरी तैयारियों के बीच वे कैसे डेरा जमाएं।