Lunar eclipse March 3: कानपुर के प्रमुख मंदिरों के पट रहेंगे बंद; पनकी हनुमान और बाबा आनंदेश्वर के दर्शन के लिए करना होगा इंतजार, जानें नया समय

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India News Live,Digital Desk : 3 मार्च (मंगलवार) को लगने वाले चंद्र ग्रहण और उसके सूतक काल का व्यापक असर कानपुर के प्रसिद्ध मंदिरों की पूजा-अर्चना और दर्शन समय पर पड़ने वाला है। सूतक काल के चलते शहर के प्रमुख सिद्धपीठों के पट सुबह ही बंद कर दिए जाएंगे और शुद्धिकरण के बाद केवल शाम को ही खुलेंगे। भक्तों को अपने आराध्य के दर्शन के लिए लंबा इंतजार करना होगा।

कानपुर के प्रमुख मंदिरों के खुलने और बंद होने का समय

प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने ग्रहण के मद्देनजर निम्नलिखित समय सारिणी जारी की है:

मंदिर का नामपट बंद होने का समयपट खुलने का समय (दर्शन हेतु)
पनकी पंचमुखी हनुमान मंदिरसुबह 4:30 बजे (आरती के बाद)शाम 7:00 बजे
बाबा आनंदेश्वर (परमट)सुबह 4:30 बजे (मंगला आरती के बाद)शाम 7:30 बजे (सफाई के बाद)
जागेश्वर मंदिर (नवाबगंज)सुबह 5:00 बजे (आरती के बाद)शाम 7:00 बजे
जेके मंदिर (JK Temple)सुबह 9:00 बजेशाम 7:30 बजे

सूतक और ग्रहण काल के जरूरी नियम

ज्योतिषाचार्य मनोज कुमार द्विवेदी और वागीश शास्त्री के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल बेहद संवेदनशील होता है। भक्तों को निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है:

तुलसी दल का महत्व: सूतक काल शुरू होने से पहले ही दूध, दही और पके हुए भोजन में तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए। इससे भोजन पर ग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव नहीं पड़ता।

मूर्त‍ि स्पर्श वर्जित: ग्रहण के दौरान मंदिर के पट बंद रहते हैं और इस काल में मूर्तियों को छूना वर्जित माना गया है।

गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानी: ज्योतिषाचार्यों ने सलाह दी है कि गर्भवती महिलाएं ग्रहण के दौरान चाकू, कैंची जैसी धारदार वस्तुओं का प्रयोग न करें और निरंतर इष्ट देव के मंत्रों का मानसिक जप करें।

शुद्धिकरण: ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर और मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। इसके बाद स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और घी का दीपक जलाकर पुनः पूजा शुरू करें।

साधना और दान का महत्व

शास्त्रों में ग्रहण काल को मंत्र सिद्धि और दान के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस दौरान किया गया जप और तप सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है। मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे शाम को पट खुलने के बाद ही मंदिर परिसर में आएं ताकि भीड़ प्रबंधन में सहयोग मिल सके।