लखनऊ को जल्द मिलेगा नया ‘लालपुल’, पुराने पक्का पुल की उसी पहचान और उसी अंदाज़ के साथ
India News Live,Digital Desk : पुराने लखनऊ का मशहूर पक्का पुल—जिसे लोग लालपुल के नाम से जानते हैं—अब अपनी ही तर्ज पर एक नए रूप में लौटने वाला है। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम पुराने पुल के बिल्कुल बराबर में एक नया आर्च वाला पुल बना रहा है, जिसकी डिजाइन और रंग दोनों लालपुल जैसे ही होंगे। इसका मतलब है कि आने-जाने वाले लोग पुरानी यादों से जुड़ा वही एहसास फिर से जी सकेंगे।
1914 में बना ब्रिटिशकालीन पुल बेहद जर्जर हो गया था, जिसकी वजह से वाहनों का आवागमन काफी समय पहले रोकना पड़ गया। इसके बाद नए पुल के निर्माण की योजना तैयार हुई और अब इसका 60% से ज्यादा काम पूरा हो चुका है।
अधिकारियों का कहना है कि पुल का निर्माण जून 2027 तक पूरा होना तय है, लेकिन लक्ष्य है कि इसे सितंबर 2026 तक ही तैयार कर दिया जाए। पुल बन जाने के बाद आस-पास की करीब पांच लाख से अधिक आबादी को बड़ी राहत मिलेगी।
चार लेन का आधुनिक ‘लालपुल’
बढ़ती आवाजाही को देखते हुए नए पक्का पुल को चार लेन का बनाया जा रहा है। लगभग 93 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह पुल 180 मीटर लंबा होगा। इसमें कुल छह आर्च बनाए जा रहे हैं और हर आर्च के बीच करीब 30 मीटर का गैप रहेगा। पुल के दोनों ओर पहुंच मार्ग लगभग 326 मीटर लंबा होगा।
फिलहाल तीन आर्च तैयार हो चुके हैं और चौथा निर्माणाधीन है। निर्माण पूरा होने पर नया और पुराना दोनों पुल इतने मिलते-जुलते दिखेंगे कि पहचानना मुश्किल हो जाएगा। सेतु निगम पुराने पुल को भी दोबारा रंगरोगन कराने पर विचार कर रहा है ताकि दोनों पुल एक जैसी पहचान बनाए रखें।
स्थानीय लोगों के लिए यह पुल क्यों खास?
नए पक्का पुल से डालीगंज और पुरनिया की तरफ से मेडिकल कॉलेज, चौक, नक्खास और आसपास के पुराने लखनऊ वाले इलाकों तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा।
इसके साथ ही चूँकि यह हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा हुआ है, इसलिए दिल्ली, बरेली, हरदोई, सीतापुर समेत अन्य शहरों की ओर जाने वाले भारी और हल्के वाहनों को भी नया पुल बड़ी सहूलियत देगा।
यह पुल न सिर्फ आवाजाही को बेहतर बनाएगा, बल्कि पुराने लखनऊ की उस ऐतिहासिक पहचान—लालपुल—को भी आने वाले दशकों तक जीवित रखेगा।