रिश्तों में बढ़ेगा प्यार, मिट जाएगी बरसों की खटास; इस होली परिवार के साथ करें होलिका की परिक्रमा, जानें क्या हैं नियम

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India News Live,Digital Desk : होली का त्योहार केवल गुलाल उड़ाने या पकवान खाने का उत्सव नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर की बुराइयों और रिश्तों की कड़वाहट को अग्नि में स्वाहा करने का पावन अवसर है। इस साल 2 मार्च 2026 की शाम को होने वाला होलिका दहन पारिवारिक एकता के लिहाज से बेहद खास माना जा रहा है। यदि आपके घर में भी अक्सर क्लेश, छोटी-बड़ी बातों पर विवाद या सदस्यों के बीच मनमुटाव रहता है, तो होलिका की अग्नि आपके जीवन में खुशहाली का नया संचार कर सकती है।

पारिवारिक शांति के लिए क्यों जरूरी है परिक्रमा?

ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, होलिका की अग्नि अत्यंत पवित्र और शुद्धिकरण का प्रतीक मानी गई है। जब परिवार के सभी सदस्य एकजुट होकर इस अग्नि की परिक्रमा करते हैं, तो घर की नकारात्मक ऊर्जा और बाहरी नजर का प्रभाव भस्म हो जाता है। यह प्रक्रिया सदस्यों के बीच आपसी तालमेल बढ़ाती है और मन के भारीपन को दूर कर रिश्तों में कोमलता लाती है।

परिक्रमा की संख्या: 3 या 7 बार लगाने से होगा लाभ

शास्त्रों में परिक्रमा की संख्या का विशेष महत्व बताया गया है। परिवार की सुख-समृद्धि के लिए 3 या 7 बार परिक्रमा करना सबसे शुभ होता है:

तीन परिक्रमा: यह मन, वचन और कर्म की शुद्धि का प्रतीक है।

सात परिक्रमा: यह परिवार के आपसी जुड़ाव और सात जन्मों के स्नेह को मजबूत करने का संकेत देती है।

परिक्रमा करते समय 'ओम होलिकायै नमः' मंत्र का मानसिक जाप करें और अपनी पुरानी शिकायतों को अग्नि में समर्पित करने का संकल्प लें।

कलह मुक्ति के लिए विशेष पूजन विधि और नियम

यदि आप चाहते हैं कि इस होली के बाद आपके घर में कभी विवाद न हो, तो इन नियमों का पालन अवश्य करें:

संकल्प लें: परिक्रमा शुरू करने से पहले हाथ में अक्षत, जल और पीली सरसों लेकर परिवार की शांति का संकल्प करें।

सही दिशा का ज्ञान: घर के सभी सदस्यों को एक साथ घड़ी की दिशा (Clockwise) में परिक्रमा करनी चाहिए।

हवन सामग्री का प्रयोग: परिक्रमा के दौरान अग्नि में पीली सरसों, सूखे नारियल के टुकड़े या काले तिल डालने से घर की नजर उतरती है।

बड़ों का आशीर्वाद: परिक्रमा पूरी होने के बाद परिवार के बुजुर्गों के चरण स्पर्श करें। मान्यता है कि इससे पितृ दोष दूर होता है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है।

दान का महत्व: पूजन संपन्न होने के बाद किसी जरूरतमंद को सफेद मिठाई या अनाज का दान करें, जिससे घर में बरकत बनी रहती है।