Lakshmi Jayanti 2026: लक्ष्मी जयंती पर चंद्र ग्रहण का साया, जानें ग्रहण के साये में कैसे करें धन की देवी की पूजा और उपाय

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India News Live,Digital Desk : हिंदू धर्म में धन, सुख और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी का जन्मोत्सव यानी लक्ष्मी जयंती अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को ही समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इस वर्ष 3 मार्च 2026 को मनाई जाने वाली लक्ष्मी जयंती विशेष होने वाली है, क्योंकि इसी दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। ऐसे में भक्तों के मन में संशय है कि ग्रहण के साये में मां लक्ष्मी की पूजा कैसे की जाए।

लक्ष्मी जयंती 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च 2026 को शाम 05:55 बजे से हो चुकी है और इसका समापन 3 मार्च को शाम 05:07 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, लक्ष्मी जयंती का पर्व 3 मार्च को ही मनाया जाएगा। इसी दिन मां लक्ष्मी की विशेष कृपा पाने के लिए दीपदान और दान-पुण्य किया जाता है।

चंद्र ग्रहण और सूतक काल का समय

लक्ष्मी जयंती के दिन लगने वाला यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य होगा। शास्त्रों के अनुसार, सूतक काल के दौरान मूर्तियों का स्पर्श और प्रत्यक्ष पूजा वर्जित होती है।

सूतक काल प्रारंभ: 3 मार्च, सुबह 09:39 बजे से

ग्रहण काल: दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:46 बजे तक

सूतक काल समाप्त: शाम 06:46 बजे (ग्रहण की समाप्ति के साथ)

ग्रहण के बीच कैसे करें मां लक्ष्मी की पूजा?

चूंकि सूतक काल सुबह से ही लग जाएगा, इसलिए भक्तों को पूजा के नियमों में कुछ बदलाव करने होंगे:

मानसिक जाप: ग्रहण काल के दौरान मूर्तियों को स्पर्श न करें। इस समय मां लक्ष्मी के बीज मंत्र 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद' का मानसिक जाप करें। ग्रहण के समय किया गया जप हजार गुना फल प्रदान करता है।

शुद्धिकरण: शाम 06:46 बजे ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल छिड़कें। स्वयं स्नान करें और फिर लक्ष्मी जी की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराकर नवीन वस्त्र पहनाएं।

देर शाम की पूजा: ग्रहण के शुद्धिकरण के बाद मां लक्ष्मी को गुलाबी कमल, इत्र और केसर युक्त खीर का भोग लगाएं। घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं।

लक्ष्मी जयंती पर जरूर करें ये उपाय

कमल के फूल: मां लक्ष्मी को गुलाबी कमल के फूल अर्पित करने से दरिद्रता दूर होती है।

खीर का भोग: पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी को सफेद मिठाई या मखाने की खीर का भोग लगाने से घर में सुख-शांति आती है।

दान-पुण्य: ग्रहण की समाप्ति के बाद किसी जरूरतमंद को सफेद वस्तु जैसे चावल, दूध या चीनी का दान करें। इससे चंद्रमा के दोष दूर होते हैं और लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं।