मोजतबा खामेनेई से जुड़े लंदन के आलीशान पेंटहाउस की होगी नीलामी: ₹460 करोड़ थी कीमत
ब्रिटेन की राजधानी लंदन के सबसे महंगे और राजनयिक दृष्टि से अति-संवेदनशील इलाके 'पैलेस ग्रीन' (केंसिंग्टन) में स्थित दो बेहद आलीशान पेंटहाउस इन दिनों अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में हैं। यह वही इलाका है जहां दुनिया के सबसे अमीर अरबपति, विदेशी राजदूत और ब्रिटिश शाही परिवार के सदस्य रहते हैं।
ब्रिटिश अखबार 'द संडे टाइम्स' और प्रमुख मीडिया आउटलेट्स की जांच रिपोर्ट के अनुसार, 3ए पैलेस ग्रीन में स्थित इन दोनों संपत्तियों का सीधा संबंध ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई से जुड़ा हुआ है। दोनों संपत्तियों को जब खरीदा गया था, तब इनकी कुल कीमत 36 मिलियन पाउंड (लगभग 450 से 460 करोड़ रुपये) थी। अब इन दोनों फ्लैट्स को बाजार में बिक्री के लिए उतार दिया गया है।
सरकारी रिकॉर्ड में कौन है मालिक? 'फ्रंटमैन' पर कसा शिकंजा
कागजातों और लैंड रजिस्ट्री के आधिकारिक रिकॉर्ड में इन फ्लैट्स का मालिकाना हक ईरानी अरबपति और बैंकर अली अंसारी के नाम दर्ज है। हालांकि, पश्चिमी खुफिया एजेंसियों और अमेरिकी वित्त विभाग (US Treasury) ने अली अंसारी को मोजतबा खामेनेई का मुख्य फाइनेंसर और 'फ्रंटमैन' करार दिया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, अंसारी ईरान के सत्ता प्रतिष्ठान और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लिए विदेशी संपत्तियों के एक विशाल नेटवर्क का प्रबंधन करते रहे हैं। ब्रिटेन और अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बाद अंसारी की संपत्ति को फ्रीज कर दिया गया था और उनके ब्रिटेन प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी।
आखिर क्यों बिक रही है यह अरबों की प्रॉपर्टी? (Writ of Receivership)
इस संपत्ति के बिकने के पीछे की मुख्य वजह वित्तीय डिफॉल्ट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हैं:
लोन और मॉर्गेज की किस्तें न चुकाना: इन फ्लैट्स की खरीद के लिए निजी वित्तीय संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय लेंडर्स से भारी-भरकम कर्ज (मॉर्गेज) लिया गया था। प्रतिबंधों के बाद जब फंडिंग चैनल्स बंद हो गए, तो अली अंसारी इन कर्जों की मासिक किस्तें चुकाने में नाकाम रहे।
ब्रिटिश सरकार की मंजूरी: कर्जदाताओं ने अपने फंसे हुए करोड़ों पाउंड वसूलने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद संपत्तियों पर रिसीवर (Receiver) नियुक्त किए गए। ब्रिटिश सरकार ने कर्ज की भरपाई के लिए इन संपत्तियों की बिक्री को हरी झंडी दे दी है।
बिक्री के बाद भी नहीं मिलेगा पैसा: कानूनी नियमों के तहत, बिक्री से जो भी रकम आएगी, उससे पहले कर्जदाताओं का बकाया चुकाया जाएगा। इसके बाद यदि कोई अतिरिक्त राशि बचती भी है, तो वह तब तक ब्रिटिश सरकार द्वारा फ्रीज रहेगी जब तक अंसारी पर से प्रतिबंध नहीं हटा लिए जाते।
क्या-क्या है इन पेंटहाउस में? कौड़ियों के दाम में बिकने की नौबत
यह कोई सामान्य रिहायशी फ्लैट नहीं हैं, बल्कि आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस राजसी पेंटहाउस हैं:
पहला पेंटहाउस: यह इमारत की छठी और सातवीं मंजिल पर फैला 3,944 वर्ग फुट का भव्य डुप्लेक्स है। इसमें 5 बड़े बेडरूम, स्टाफ के रहने के लिए अलग क्वार्टर और एक विशाल प्राइवेट रूफ टेरेस है, जहां से केंसिंग्टन गार्डन्स का मनमोहक नजारा दिखता है। इसे 2016 में करीब 19 मिलियन पाउंड में खरीदा गया था, लेकिन अब इसे लगभग 12 मिलियन पाउंड (करीब 140 से 153 करोड़ रुपये) में बिक्री के लिए लिस्ट किया गया है—यानी खरीद मूल्य से करीब 7 मिलियन पाउंड (लगभग 80 करोड़ रुपये) कम पर।
दूसरा पेंटहाउस: इसी इमारत की सातवीं और आठवीं मंजिल पर स्थित इस दूसरे पेंटहाउस को 2014 में 16.75 मिलियन पाउंड में खरीदा गया था। इसमें भी निजी टैरेस और स्टाफ आवास मौजूद हैं, हालांकि इसे सार्वजनिक तौर पर सीधे लिस्ट नहीं किया गया है।
इजरायली दूतावास से सिर्फ 50 मीटर की दूरी: सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप
इन फ्लैट्स की कीमत से ज्यादा चर्चा इनकी भौगोलिक स्थिति को लेकर हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह इमारत लंदन स्थित इजरायली दूतावास से 50 मीटर से भी कम दूरी पर है।
ब्रिटिश सुरक्षा और आतंकवाद रोधी विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि इन पेंटहाउस की खिड़कियों और छतों से इजरायली दूतावास के पिछले हिस्से का सीधा और साफ दृश्य दिखाई देता है। इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियों की भौंहें तन गई थीं कि क्या इनका इस्तेमाल खुफिया निगरानी या संवेदनशील गतिविधियों के लिए किया जा सकता था। हालांकि, अब इन संपत्तियों की सार्वजनिक बिक्री शुरू होने से पश्चिम में फैले ईरानी शासन के गुप्त वित्तीय नेटवर्क पर एक और बड़ा प्रहार माना जा रहा है।