काशी के घाटों पर उतरा उजाला, सीएम योगी ने किया देव दीपावली का शुभारंभ
India News Live,Digital Desk : आस्था, संस्कृति और परंपरा के संगम पर मनाए जाने वाले देव दीपावली पर्व का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नमो घाट पर पहला दीप जलाकर किया।
गंगा पूजन के बाद जैसे ही सीएम ने दीप प्रज्ज्वलित किया, वैसे ही श्री काशी विश्वनाथ धाम सहित गंगा के सभी 88 घाट लाखों दीपों से जगमगा उठे।
पूरा तट एक बार फिर से उस दिव्यता में नहाया, जिसे देखने लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से काशी पहुंचे थे।
गंगा किनारे दीपों की जगमगाहट, स्वर्ग सा दृश्य
गंगा घाटों पर दीपों की झिलमिलाहट ने ऐसा नज़ारा पेश किया जैसे आकाश की असंख्य तारिकाएं धरती पर उतर आई हों।
हर घाट, हर सीढ़ी, हर लहर पर दीपों की पंक्तियाँ ऐसी प्रतीत हो रही थीं मानो देवता स्वयं काशी में अवतरित हो गए हों।
देव दीपावली भगवान शिव की त्रिपुरासुर पर विजय के उपलक्ष्य में मनाई जाती है।
मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने ब्रह्मांड की रक्षा की थी, और देवताओं ने उनकी इस विजय के उपलक्ष्य में गंगा तट पर दीप जलाकर उत्सव मनाया था।
योगी ने देखा गंगा घाटों का अद्भुत दृश्य और लेज़र शो
दीप प्रज्वलन के बाद सीएम योगी ने नमो घाट से क्रूज़ द्वारा घाटों का भ्रमण किया और देव दीपावली के विहंगम दृश्य का अवलोकन किया।
उन्होंने शिवाला घाट पर गंगा की लहरों पर होने वाले लेज़र शो और ग्रीन आतिशबाजी को भी देखा।
इस दौरान उनके साथ पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, राज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल, मेयर अशोक तिवारी, विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, मुख्य सचिव एस.पी. गोयल, कमिश्नर एस. राजलिंगम, और डीएम सत्येंद्र कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पौराणिक कथाओं में रची-बसी देव दीपावली की कथा
देव दीपावली का संबंध भगवान शिव और त्रिपुरासुर दानवों की कथा से है।
कहते हैं कि जब शिव ने अपने पाशुपत बाण से तीनों किलों का नाश किया, तब देवताओं ने आनंद में दीप जलाकर काशी को आलोकित किया।
इसी दिन से यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक बन गया।
एक अन्य कथा के अनुसार, राजा दिवोदास के आमंत्रण पर देवताओं के पुनः काशी लौटने के अवसर पर भी घाटों पर दीप जलाए गए थे।
तभी से यह पर्व देवताओं के स्वागत का प्रतीक माना जाता है।
आधुनिकता के संग पौराणिक आस्था का संगम
आज का देव दीपावली पर्व न सिर्फ़ धार्मिक, बल्कि संस्कृतिक और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बन चुका है।
नमो घाट, दशाश्वमेध और शीतला घाट पर हजारों दीपों से सजी गंगा आरती ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
शिवाला घाट पर आयोजित लेज़र शो और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ इस प्राचीन पर्व को आधुनिक रंग देती हैं।
साथ ही, यह अवसर शहीद सैनिकों के सम्मान का भी प्रतीक बन गया है।
सेना, वायुसेना, नौसेना और एनसीसी के जवान शहीदों के नाम पर आकाशदीप जलाकर उन्हें नमन करते हैं।
काशी बनी प्रकाश की नगरी
रात ढलते ही गंगा किनारे का हर घाट, हर छत और हर मंदिर दीपों की सुनहरी आभा में डूब गया।
चारों ओर फैली इस रौशनी ने एक बार फिर साबित किया कि काशी सिर्फ़ एक शहर नहीं, बल्कि आस्था और प्रकाश की नगरी है — जहाँ हर दीप में भक्ति, परंपरा और देशभक्ति की ज्योति जलती है।