पितृ पक्ष खत्म होने के बाद पूर्वज कहां जाते हैं? जानें धार्मिक मान्यताएं और ज्योतिषीय दृष्टि

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India News Live,Digital Desk : पितृ पक्ष वह समय होता है जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। यह विश्वास है कि इस दौरान हमारे पूर्वज हमारे पास आते हैं और हमें आशीर्वाद देते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक चलता है।

साल 2025 में पितृ पक्ष की समाप्ति:
21 सितंबर को पड़ने वाली सर्व पितृ अमावस्या इस साल पितृ पक्ष का आखिरी दिन है। इस दिन के बाद पूर्वज अपने निवास स्थान लौट जाते हैं। लेकिन सवाल उठता है कि पितृ पक्ष समाप्त होने के बाद पूर्वज कहां जाते हैं?

पितृसत्ता के बाद पूर्वज कहां रहते हैं?

धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हमारे पूर्वज पितृलोक नामक विशेष लोक में निवास करते हैं। यह लोक स्वर्ग और पृथ्वी के बीच स्थित है। मृत्यु के बाद आत्मा इसी लोक में प्रवेश करती है।

पितृ पक्ष के दौरान, यमराज सभी आत्माओं को अपने वंशजों से मिलने के लिए पृथ्वी पर आने की अनुमति देते हैं। पितृ पक्ष समाप्त होने पर, पृथ्वी के द्वार बंद हो जाते हैं और पूर्वज वापस अपने पितृलोक लौट जाते हैं।

सर्व पितृ अमावस्या और पूर्वजों की विदाई

सर्व पितृ अमावस्या की रात पूर्वज अपने लोक लौट जाते हैं। इस दिन जल, भोजन और तर्पण करके उन्हें सम्मान दिया जाता है ताकि वे अपनी यात्रा सुरक्षित तरीके से पूरी कर सकें।

यह प्रतीकात्मक रूप से यह दर्शाता है कि हम अपने पूर्वजों को प्रेम और श्रद्धा के साथ विदा कर रहे हैं। संतुष्ट होकर लौटने वाले पूर्वज वंशजों को सुख-समृद्धि और आशीर्वाद देते हैं।

पितृलोक में नहीं लौटने वाले पूर्वज

यदि किसी व्यक्ति का श्राद्ध पूर्णतया सही ढंग से संपन्न हो जाता है, तो उसके पूर्वज केवल पितृलोक में लौटते ही नहीं हैं। उन्हें मोक्ष प्राप्त होने की संभावना भी रहती है। ऐसे में वे स्वर्ग में सुख भोगते हैं या भगवान के धाम में निवास कर उनकी सेवा करते हैं।

पूर्वजों को भोजन कौन पहुँचाता है?

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार भोजन मुख्यतः ब्राह्मणों, कौओं, कुत्तों और गायों के माध्यम से पितरों तक पहुँचता है।

पूर्वजों को मुक्त कैसे करें?

बंधे हुए पितरों को मुक्त कराने के लिए पितृ पक्ष के दौरान तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।