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September 26 2026 10:12 pm

नेपाल सीमा से सटे जिले हाई अलर्ट पर, सीएम योगी का निर्देश- खुद फील्ड में उतरें सभी डीएम

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उत्तर प्रदेश में पिछले 48 घंटों से जारी अनवरत और मूसलाधार बारिश ने पूरे राज्य में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रही भारी बरसात और तेज आंधी-तूफान के कारण नदियां, नाले और रिहायशी इलाके उफान पर हैं। खासकर नेपाल के पहाड़ी जलग्रहण क्षेत्रों और तराई के मैदानी इलाकों में हो रही भीषण बारिश के चलते उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) और जलभराव का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन और राहत आयुक्त कार्यालय पूरी तरह एक्शन मोड में आ चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद प्रदेश के राहत आयुक्त ने नेपाल सीमा से सटे सभी संवेदनशील जनपदों में हाई अलर्ट घोषित करते हुए संबंधित जिलाधिकारियों को वातानुकूलित दफ्तरों से निकलकर खुद धरातल पर उतरने का कड़ा फरमान सुनाया है। प्रशासनिक अमले को स्पष्ट कह दिया गया है कि विषम मौसम के दौरान आम जनता की सुरक्षा और राहत कार्यों में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

63 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा, फर्रुखाबाद और कानपुर में टूटे सारे रिकॉर्ड

राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कुल 75 जिलों में से 63 जनपदों में सामान्य से कई गुना अधिक बारिश दर्ज की गई है। पिछले 24 घंटों के भीतर पूरे प्रदेश में औसत के मुकाबले 19 गुना अधिक पानी बरसा है। मध्य और तराई उत्तर प्रदेश के जिलों में वर्षा के आंकड़ों ने दशकों के पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।

आंकड़ों पर गौर करें तो जनपद फर्रुखाबाद में सामान्य से 200 गुना अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जिससे वहां की निचली बस्तियां पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं। इसी प्रकार औद्योगिक नगरी कानपुर नगर में सामान्य से 160 गुना ज्यादा बारिश हुई है। इसके अलावा कन्नौज, कानपुर देहात और हरदोई जनपदों में सामान्य से 130 गुना अधिक बरसात दर्ज की गई है। दूसरी ओर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ चुनिंदा जनपदों जैसे बागपत, गाजियाबाद, मथुरा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ में मौसम अपेक्षाकृत शांत रहा और वहां बारिश नहीं दर्ज हुई। इस भारी वर्षा के चलते प्रदेशभर में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और शहरी ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त नजर आ रहा है।

नेपाल से सटे सीमावर्ती जिलों में अलर्ट, उफनाई नदियों पर पैनी नजर

नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बीते चार दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते सीमावर्ती जनपदों जैसे लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज में बाढ़ का खतरा चरम पर पहुंच गया है। पहाड़ी नदियों—घाघरा, राप्ती, बूढ़ी राप्ती, सरयू, शारदा और बानगंगा का जलस्तर तेजी से चेतावनी बिंदु (Warning Level) और खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है।

नेपाल के विभिन्न बैराजों और जलप्रपातों से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने की आशंका को देखते हुए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों को तटबंधों (Embankments) पर 24 घंटे पेट्रोलिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। सीमावर्ती चौकियों पर तैनात सुरक्षा बलों, एसएसबी (SSB) और स्थानीय पुलिस को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि सीमा पार आवागमन करने वाले यात्रियों और ग्रामीणों को नदियों के उफान के प्रति सचेत किया जा सके। बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है और तराई क्षेत्रों में लाउडस्पीकर के माध्यम से चेतावनी प्रसारित की जा रही है।

जिलाधिकारियों को फील्ड में रहने के निर्देश, SDRF और NDRF मुस्तैद

राहत आयुक्त ने सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी है कि वे स्वयं फील्ड में रहकर जमीनी हालात का लगातार जायजा लें और परिस्थिति के अनुसार मौके पर ही त्वरित निर्णय लें। राहत और बचाव कार्यों को गति देने के लिए आवश्यकतानुसार फायर सर्विस, प्रांतीय सशस्त्र बल (PAC), सिविल डिफेंस, होमगार्ड और प्रशिक्षित 'आपदा मित्रों' की सेवाएं तत्काल प्रभाव से लेने को कहा गया है।

जलभराव वाले इलाकों और नदी किनारे बसे गांवों में नावों, मोटरबोटों और राहत शिविरों का प्रबंध सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों को संवेदनशील जनपदों में रणनीतिक रूप से तैनात कर दिया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में बिना समय गंवाए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जा सके। सभी संबंधित उपखंड अधिकारियों (SDM), तहसीलदारों और बीडीओ को भी अपने-अपने क्षेत्रों में रात्रि प्रवास करने और फोन चालू रखने के आदेश हैं।

117 मकान क्षतिग्रस्त, पीड़ितों को तत्काल मुआवजा और फसल सर्वे के आदेश

शासन को मिली प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, बीते 48 घंटों में अतिवृष्टि, आंधी और कच्चे मकानों की सीलन के कारण प्रदेश में 117 से अधिक मकानों के क्षतिग्रस्त होने अथवा ढहने की आधिकारिक सूचना दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया है कि जिन गरीब परिवारों के आशियाने इस आपदा में उजड़ गए हैं या जिनके परिजनों की जान गई है, उन्हें 24 घंटे के भीतर दैवीय आपदा राहत कोष से अनुमन्य सहायता राशि का वितरण सुनिश्चित किया जाए।

इसके साथ ही खेतों में लहलहा रही धान, तिलहन और गन्ने की फसलों के जलमग्न होने से अन्नदाता किसानों पर जो भारी मार पड़ी है, उसका भी तत्काल संज्ञान लिया गया है। राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खेतों में जाकर फसलों के नुकसान का निष्पक्ष सर्वे करें, ताकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और राज्य आपदा प्रबंधन कोष से किसानों को समय पर मुआवजा दिलाया जा सके।

36 घंटे बाद मौसम में सुधार के आसार, हेल्पलाइन 1070 जारी

मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, वायुमंडलीय दबाव में आए बदलाव और बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती परिसंचरण का असर अगले 36 घंटों तक बना रहेगा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 36 घंटे बीतने के बाद मानसूनी बादलों का जोर धीरे-धीरे कम होगा और मौसम सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़ेगा। तब तक पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश के अधिकांश इलाकों में रुक-रुक कर तेज बारिश और आकाशीय बिजली चमकने की आशंका बनी रहेगी।

राहत आयुक्त कार्यालय ने आम नागरिकों से अपील की है कि जब तक अत्यधिक आवश्यक कार्य न हो, वे भारी बारिश के दौरान घरों से बाहर न निकलें, जर्जर दीवारों और भारी पेड़ों की ओट में खड़े न हों और बिजली के खंभों व तारों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति, जलभराव या आपदा की सूचना देने के लिए राज्य स्तरीय इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर की टोल-फ्री हेल्पलाइन संख्या 1070 चौबीसों घंटे सक्रिय कर दी गई है।