सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या अब 38 मोदी कैबिनेट ने दी मंजूरी, जानें किस देश में हैं सबसे ज्यादा जज
India News Live, Digital Desk: देश की न्यायिक प्रणाली को और अधिक सशक्त और तेज बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 05 मई 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के बाद अब देश के सर्वोच्च न्यायालय में जजों की कुल संख्या 38 (मुख्य न्यायाधीश सहित) हो जाएगी।
34 से बढ़कर 38 होगी संख्या
वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 34 (33 जज + 1 मुख्य न्यायाधीश) है। कैबिनेट ने इसमें 4 और जजों की वृद्धि को हरी झंडी दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार जल्द ही संसद के आगामी सत्र में 'सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026' पेश करेगी।
न्यायाधीशों की संख्या का सफर:
1950: शुरुआत में केवल 8 जज (CJI सहित) थे।
2009: संख्या बढ़ाकर 31 की गई।
2019: इसे बढ़ाकर 34 (33+1) किया गया।
2026: अब यह बढ़कर 38 होने जा रही है।
क्यों पड़ी संख्या बढ़ाने की जरूरत?
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों (Pendency) का बढ़ता बोझ सबसे बड़ी चिंता है। वर्तमान में कोर्ट में करीब 92,000 से अधिक मामले लंबित हैं। जजों की संख्या बढ़ने से संवैधानिक पीठों का गठन आसान होगा और पुराने मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।
चीन में हैं दुनिया के सबसे ज्यादा जज
जजों की संख्या के मामले में भारत का पड़ोसी देश चीन पूरी दुनिया में सबसे आगे है।
सर्वोच्च जन न्यायालय (SPC): चीन की इस शीर्ष अदालत में लगभग 400 जज काम करते हैं।
प्रशासनिक ढांचा: यहाँ जजों की सहायता के लिए 600 से अधिक प्रशासनिक कर्मचारी भी तैनात हैं।
कार्यप्रणाली: यह अदालत सीधे तौर पर कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के नियंत्रण में रहती है और मृत्युदंड की पुष्टि जैसे गंभीर मामलों पर अंतिम निर्णय लेती है।
आगे की प्रक्रिया
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब गेंद संसद के पाले में है। विधेयक पारित होने और राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम नए जजों के नाम की सिफारिश सरकार को भेजेगा। इससे न केवल न्याय मिलने में लगने वाला समय कम होगा, बल्कि भारतीय न्यायपालिका की कार्यक्षमता में भी सुधार होगा।