24 या 25 जुलाई? जानें देवशयनी एकादशी की सही तारीख और भूलकर भी न करें ये 5 बड़ी गलतियां
नई दिल्ली। सनातन धर्म में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का विशेष महत्व है, जिसे देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन से भगवान श्री हरि विष्णु अगले चार महीनों के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं और सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इस वर्ष देवशयनी एकादशी की सही तिथि को लेकर थोड़ा भ्रम है। हिंदू पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 24 जुलाई 2026 की सुबह 09:12 बजे से प्रारंभ होकर 25 जुलाई 2026 की सुबह 11:34 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि की शास्त्रीय मान्यता के आधार पर देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई 2026 को ही रखा जाएगा।
देवशयनी एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन कुछ नियमों का पालन करना हर इंसान के लिए जरूरी है, चाहे आपने व्रत रखा हो या न रखा हो। इस दिन की गई छोटी सी गलती भी भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को नाराज कर सकती है:
तुलसी दल तोड़ना या स्पर्श करना: तुलसी जी भगवान विष्णु को अत्यधिक प्रिय हैं और उनके बिना नारायण भोग स्वीकार नहीं करते। देवशयनी एकादशी के दिन भूलकर भी तुलसी की पत्तियों को न तो तोड़ना चाहिए और न ही स्पर्श करना चाहिए। भोग के लिए एक दिन पहले ही तुलसी दल तोड़कर रख लें।
चावल का सेवन: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी तिथि के दिन घर में चावल बनाना और खाना पूरी तरह वर्जित होता है। माना जाता है कि इस दिन चावल खाने से दोष लगता है और पुण्य फल नष्ट हो जाते हैं।
काले वस्त्र पहनना: किसी भी शुभ कार्य या पूजा-पाठ में काले रंग के कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है। एकादशी की पूजा के दौरान काले वस्त्रों से परहेज करें। इस दिन भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए पीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करना सर्वोत्तम है।
तामसिक भोजन और मांस-मदिरा: इस पावन तिथि पर पूरी तरह सात्विकता का पालन करें। घर में लहसुन-प्याज का प्रयोग न करें और भूलकर भी मांस-मदिरा या नशीली चीजों का सेवन न करें, अन्यथा भगवान विष्णु का भारी प्रकोप झेलना पड़ सकता है।
वाद-विवाद और अपमान: एकादशी व्रत मन की शुद्धता का पर्व है। इस दिन किसी भी व्यक्ति का दिल दुखाने, मजाक उड़ाने, अपशब्द बोलने या घर में गृह-क्लेश करने से बचना चाहिए।