JP Morgan's big forecast : 2027 तक ब्रेंट क्रूड की कीमत 30 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकती है, भारत में पेट्रोल-डीज़ल सस्ते होने की संभावना

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India News Live,Digital Desk : महंगाई से परेशान आम जनता के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। अमेरिकी वित्तीय संस्था जेपी मॉर्गन की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट देखने को मिल सकती है।

पूर्वानुमान के अनुसार, 2027 तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 30 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि तेल की आपूर्ति मांग से कई गुना बढ़ जाएगी। यह भारत जैसे देश के लिए एक वरदान है, क्योंकि हम अपनी अधिकांश तेल ज़रूरतों का आयात करते हैं। अगर क्रूड सस्ता होता है, तो भारत में ईंधन की कीमतें सीधे आधी हो सकती हैं।

पूर्वानुमान के अनुसार, 2027 तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 30 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि तेल की आपूर्ति मांग से कई गुना बढ़ जाएगी। यह भारत जैसे देश के लिए एक वरदान है, क्योंकि हम अपनी अधिकांश तेल ज़रूरतों का आयात करते हैं। अगर क्रूड सस्ता होता है, तो भारत में ईंधन की कीमतें सीधे आधी हो सकती हैं।

जे.पी. मॉर्गन के रणनीतिकारों के अनुसार, यह सच है कि अगले 3 वर्षों में वैश्विक तेल की खपत बढ़ेगी, लेकिन तेल उत्पादन उससे भी तेज़ी से बढ़ेगा। न केवल ओपेक+ देश, बल्कि अन्य देश भी कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ा रहे हैं। इस बढ़े हुए उत्पादन से बाजार में कच्चे तेल की अधिकता होगी, जिससे कीमतों में गिरावट आएगी। अनुमान के अनुसार, 2025 में वैश्विक तेल की मांग में प्रतिदिन 0.9 मिलियन बैरल की वृद्धि होगी, जिससे कुल खपत 105.5 मिलियन बैरल हो जाएगी।

जे.पी. मॉर्गन के रणनीतिकारों के अनुसार, यह सच है कि अगले 3 वर्षों में वैश्विक तेल की खपत बढ़ेगी, लेकिन तेल उत्पादन उससे भी तेज़ी से बढ़ेगा। न केवल ओपेक+ देश, बल्कि अन्य देश भी कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ा रहे हैं। इस बढ़े हुए उत्पादन से बाजार में कच्चे तेल की अधिकता होगी, जिससे कीमतों में गिरावट आएगी। अनुमान के अनुसार, 2025 में वैश्विक तेल की मांग में प्रतिदिन 0.9 मिलियन बैरल की वृद्धि होगी, जिससे कुल खपत 105.5 मिलियन बैरल हो जाएगी।

ब्रेंट क्रूड की कीमतें फिलहाल 60 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रही हैं। जेपी मॉर्गन के विश्लेषण के अनुसार, 2027 तक औसत कीमत 42 डॉलर तक गिर सकती है और साल के अंत तक 30 डॉलर से भी नीचे जा सकती है। इसका सीधा सा मतलब है कि कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर से आधी हो जाएँगी।

ब्रेंट क्रूड की कीमतें फिलहाल 60 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रही हैं। जेपी मॉर्गन के विश्लेषण के अनुसार, 2027 तक औसत कीमत 42 डॉलर तक गिर सकती है और साल के अंत तक 30 डॉलर से भी नीचे जा सकती है। इसका सीधा सा मतलब है कि कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर से आधी हो जाएँगी।

कच्चा तेल सस्ता होने पर तेल कंपनियों की उत्पादन लागत कम होती है और सरकार का आयात बिल भी कम होता है। ऐसे में कंपनियां कीमतों में कमी का फायदा आम उपभोक्ताओं तक पहुँचा सकती हैं, इसलिए पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें आधी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

कच्चा तेल सस्ता होने पर तेल कंपनियों की उत्पादन लागत कम होती है और सरकार का आयात बिल भी कम होता है। ऐसे में कंपनियां कीमतों में कमी का फायदा आम उपभोक्ताओं तक पहुँचा सकती हैं, इसलिए पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें आधी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

यह खबर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 'गेम चेंजर' साबित हो सकती है। भारत अपनी तेल ज़रूरतों का 85% से ज़्यादा आयात करता है, जिससे सरकार को अरबों डॉलर का नुकसान होता है। अगर कच्चे तेल की कीमतें अपने निचले स्तर पर पहुँच जाती हैं, तो भारत के खजाने पर बोझ कम होगा और मुद्रास्फीति पर काबू पाया जा सकेगा।

यह खबर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 'गेम चेंजर' साबित हो सकती है। भारत अपनी तेल ज़रूरतों का 85% से ज़्यादा आयात करता है, जिससे सरकार को अरबों डॉलर का नुकसान होता है। अगर कच्चे तेल की कीमतें अपने निचले स्तर पर पहुँच जाती हैं, तो भारत के खजाने पर बोझ कम होगा और मुद्रास्फीति पर काबू पाया जा सकेगा।

जेपी मॉर्गन ने यह अनुमान यूँ ही नहीं लगाया। इसके पीछे ठोस कारण हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2027 तक कुल आपूर्ति वृद्धि का आधा हिस्सा अपरंपरागत स्रोतों से आएगा। आधुनिक तकनीक के कारण, गहरे समुद्र में तेल निकालना अब आसान और सस्ता हो गया है। इसके अलावा, अमेरिका समेत कई देशों में 'शेल ऑयल' का उत्पादन भी लगातार बढ़ रहा है। 2029 तक तेल निष्कर्षण परियोजनाओं की पुष्टि हो चुकी है, जो भविष्य में बड़ी आपूर्ति का संकेत देती है।

जेपी मॉर्गन ने यह अनुमान यूँ ही नहीं लगाया। इसके पीछे ठोस कारण हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2027 तक कुल आपूर्ति वृद्धि का आधा हिस्सा अपरंपरागत स्रोतों से आएगा। आधुनिक तकनीक के कारण, गहरे समुद्र में तेल निकालना अब आसान और सस्ता हो गया है। इसके अलावा, अमेरिका समेत कई देशों में 'शेल ऑयल' का उत्पादन भी लगातार बढ़ रहा है। 2029 तक तेल निष्कर्षण परियोजनाओं की पुष्टि हो चुकी है, जो भविष्य में बड़ी आपूर्ति का संकेत देती है।