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May 06 2026 04:33 pm

तीस्ता जल विवाद पर बांग्लादेश का कड़ा रुख,अब भारत का इंतजार नहीं करेंगे चीन से मांगेंगे मदद

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India News Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ऐतिहासिक जीत के बीच पड़ोसी देश बांग्लादेश ने तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे को लेकर बड़ा बयान दिया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि उनके देश के लिए तीस्ता समझौता बेहद जरूरी है और अब वे इसके लिए भारत का और अधिक इंतजार नहीं कर सकते।

चीन के साथ 'तीस्ता प्रोजेक्ट' पर होगी बात

खलीलुर रहमान जल्द ही तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर चीन जा रहे हैं। बीजिंग रवाना होने से पहले मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनके एजेंडे में 'तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना' सबसे ऊपर है। रहमान वहां चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात करेंगे और इस प्रोजेक्ट के लिए तकनीकी सहयोग के साथ-साथ कम ब्याज दर पर कर्ज की भी मांग करेंगे।

बंगाल में सत्ता बदलने पर रहमान की टिप्पणी

जब उनसे पूछा गया कि पश्चिम बंगाल में अब बीजेपी की सरकार बनने जा रही है, तो उनका रुख क्या होगा? इस पर रहमान ने बेबाकी से कहा:"पश्चिम बंगाल में अभी नई सरकार ने कामकाज शुरू नहीं किया है। वे क्या करेंगे, यह उनका फैसला है। हम हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठ सकते। हमें अपने देश के हितों के लिए काम करना है।"

क्या है तीस्ता विवाद? (एक नजर में)

तीस्ता नदी के पानी को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच दशकों से खींचतान चल रही है:

1983 का अस्थायी समझौता: इसमें बांग्लादेश को 36% और भारत को 39% पानी देने की बात थी, लेकिन यह कभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ।

2011 की कोशिश: तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह के दौरे पर 37.5% (बांग्लादेश) और 42.5% (भारत) के बंटवारे का प्रस्ताव था, जिसे ममता सरकार के विरोध के कारण टालना पड़ा।

मौजूदा स्थिति: भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 नदियां साझा होती हैं, लेकिन अब तक केवल गंगा और कुशियारा पर ही समझौता हो पाया है।

चीन की बढ़ती दिलचस्पी और भारत की चिंता

बांग्लादेश ने 2019 में तीस्ता प्रबंधन के लिए चीन से मदद मांगी थी। अब रहमान के इस दौरे से संकेत मिल रहे हैं कि बांग्लादेश इस परियोजना को पूरी तरह चीन के हाथों में सौंपने की तैयारी कर रहा है। भारत के लिए यह सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील मुद्दा है, क्योंकि तीस्ता नदी का क्षेत्र भारत के 'सिलिगुड़ी कॉरिडोर' (चिकन नेक) के करीब है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश का यह कदम भारत पर दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकता है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली में केंद्र सरकार और कोलकाता में नई राज्य सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।