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May 12 2026 05:55 pm

ईरान-अमेरिका तनाव: तेहरान ने शांति की ओर बढ़ाया कदम, पाकिस्तानी मध्यस्थों को सौंपा नया प्रस्ताव; क्या थमेगा युद्ध?

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India News Live,Digital Desk : मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। ईरान ने अमेरिका के साथ जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए एक नया बातचीत का प्रस्ताव भेजा है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने शुक्रवार को इस विकास की पुष्टि की है। इस खबर के आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है।

तेल की कीमतों पर पड़ा सीधा असर

जब से ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी शुरू की है, वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की 20 फीसदी सप्लाई बाधित हो गई थी। इसके कारण ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही थीं और दुनिया भर में मंदी का खतरा मंडराने लगा था। ईरान के इस नए प्रस्ताव ने निवेशकों के बीच यह उम्मीद जगाई है कि जल्द ही समुद्र का यह अहम रास्ता पूरी तरह खुल सकता है।

पाकिस्तानी मध्यस्थों की भूमिका अहम

ईरान और अमेरिका के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध न होने के कारण पाकिस्तान लंबे समय से दोनों देशों के बीच पुल का काम करता रहा है।

नया प्रस्ताव: ईरान ने अपना ड्राफ्ट पाकिस्तान को सौंप दिया है, हालांकि इसके विस्तृत बिंदुओं का खुलासा अभी नहीं किया गया है।

वॉशिंगटन की प्रतिक्रिया: अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह प्रस्ताव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक पहुंच गया है या नहीं। मंगलवार को ट्रंप ने कहा था कि वे ईरान के पिछले प्रस्तावों से खुश नहीं थे।

सीजफायर के बीच युद्ध की आशंका

भले ही 8 अप्रैल से दोनों देशों के बीच सीजफायर (युद्धविराम) लागू है, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ है।

ईरान की तैयारी: रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सूत्रों ने बताया कि तेहरान ने अपनी हवाई सुरक्षा प्रणाली को 'हाई अलर्ट' पर रखा है। ईरान को डर है कि अमेरिका और इजरायल मिलकर उन पर एक "छोटा और जोरदार" हमला कर सकते हैं।

ट्रंप प्रशासन का स्टैंड: शुक्रवार को ट्रंप प्रशासन ने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई सक्रिय युद्ध नहीं चल रहा है। व्हाइट हाउस का कहना है कि वे फिलहाल शांति समझौते की कोशिश कर रहे हैं।

वॉर पावर्स रेजोल्यूशन और संवैधानिक संकट

अमेरिका के भीतर इस समय एक कानूनी बहस भी छिड़ गई है। 'वॉर पावर्स रेजोल्यूशन' के तहत राष्ट्रपति को सैन्य अभियान शुरू करने के 60 दिनों के भीतर संसद से मंजूरी लेनी होती है।

डेडलाइन: 28 फरवरी को शुरू हुई इस सैन्य कार्रवाई की 60 दिनों की सीमा 1 मई 2026 को खत्म हो रही है।

संसद की राय: हाउस स्पीकर माइक जॉनसन का मानना है कि चूंकि अभी बमबारी या सक्रिय लड़ाई नहीं हो रही है, इसलिए संसद से अलग से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह पूरा संकट 28 फरवरी को तब शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ठिकानों पर हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया और हिज्बुल्ला ने इजरायल पर मिसाइलें दागीं। अब पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान द्वारा पहुंचाए गए इस नए प्रस्ताव पर टिकी हैं, जो इस क्षेत्र में स्थायी शांति का रास्ता खोल सकता है।