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September 04 2026 12:36 pm

ईरान ने खींच दी 'लक्ष्मण रेखा' होर्मुज की खाड़ी में अब वही गुजरेगा जिसे तेहरान चाहेगा

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India News Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव के बीच ईरान ने एक ऐसा दांव चल दिया है जिसने वैश्विक शक्तियों की नींद उड़ा दी है। ईरान की ताकतवर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने 'होर्मुज की खाड़ी' (Strait of Hormuz) को लेकर नई 'लक्ष्मण रेखा' खींचने का ऐलान किया है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अब इस रणनीतिक जलमार्ग से कौन सा जहाज गुजरेगा और कौन सा नहीं, इसका फैसला केवल तेहरान करेगा। ईरान की इस सैन्य 'घेरेबंदी' ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को सीधे युद्ध की चुनौती दे दी है।

समंदर में ईरान की नई 'चौकीदारी', दुनिया के लिए खतरे की घंटी

ईरानी सैन्य कमांडरों ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि होर्मुज की खाड़ी में सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी केवल उनकी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि किसी भी बाहरी हस्तक्षेप या शत्रुतापूर्ण गतिविधि वाले जहाज को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बता दें कि दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकीर्ण रास्ते से होकर गुजरता है। अगर ईरान इस रास्ते को ब्लॉक करता है या जहाजों को रोकता है, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह सकती है।

अमेरिका के लिए 'चेक और मेट' की स्थिति?

ईरान का यह ऐलान तब आया है जब हाल ही में अमेरिकी नौसेना और ईरानी ड्रोन्स के बीच भीषण झड़प की खबरें आई थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने यह कदम अमेरिका को दबाव में लाने के लिए उठाया है। होर्मुज को अपनी जागीर घोषित करना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों को सीधी चुनौती है। व्हाइट हाउस ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता को बाधित नहीं होने देगा। जानकारों का कहना है कि अगर अमेरिका अपने जहाजों को जबरन निकालने की कोशिश करता है, तो समंदर में भीषण मिसाइल युद्ध छिड़ना तय है।

होर्मुज की अहमियत: क्यों डर रही है पूरी दुनिया?

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक ऐसा पतला रास्ता है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों के जहाज यहीं से होकर गुजरते हैं। ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह उन देशों के जहाजों को निशाना बना सकता है जो उसकी नीतियों का विरोध कर रहे हैं। इस 'लक्ष्मण रेखा' के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की आशंका है।

महायुद्ध की आहट: क्या फिर दहलेगा खाड़ी क्षेत्र?

ईरान की इस आक्रामक घोषणा के बाद खाड़ी क्षेत्र में 'रेड अलर्ट' जैसी स्थिति है। इजरायल और अमेरिका ने अपनी नौसेनाओं को पहले ही तैनात कर रखा है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि ईरान अपनी नई 'लक्ष्मण रेखा' के जरिए दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि वह पश्चिम एशिया का असली 'बॉस' है। अब देखना यह होगा कि क्या अमेरिका इस नई चुनौती को स्वीकार करता है या फिर कूटनीति के जरिए इस बारूदी सुरंग को फटने से रोका जा सकेगा।