ईरान-US महायुद्ध: जहाज जब्ती के बाद भड़का ईरान, शहबाज शरीफ को फोन कर जताई 'कड़ी आपत्ति'

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India News Live,Digital Desk : होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी मालवाहक जहाज 'तूस्का' को बलपूर्वक जब्त किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। इस घटना से बौखलाए ईरान ने मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान को फोन कर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से सीधे बात की है, जिससे इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता पर काले बादल मंडराने लगे हैं।

"अमेरिका कर रहा कूटनीति के साथ विश्वासघात": पेजेश्कियान

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पीएम शहबाज शरीफ से बातचीत में अमेरिका की कार्रवाई को 'खुली दादागिरी' करार दिया। पेजेश्कियान ने कहा कि अमेरिका एक तरफ बातचीत का ढोंग कर रहा है और दूसरी तरफ ईरानी जहाजों पर हमले कर रहा है। उन्होंने पाकिस्तानी पीएम से कहा कि यह 'कूटनीति के साथ विश्वासघात' है और ऐसी स्थिति में अमेरिका पर भरोसा करना नामुमकिन है।

स्पूरांस की तोपों से 'तूस्का' का इंजन रूम तबाह

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस सैन्य कार्रवाई का ब्यौरा जारी किया है। सेंटकॉम के अनुसार:

USS स्पूरांस ने ईरानी जहाज 'तूस्का' को छह घंटे तक बार-बार रुकने की चेतावनी दी।

जब चालक दल ने आदेश नहीं माना, तो अमेरिकी युद्धपोत की 5-इंच MK 45 तोप से तूस्का के इंजन रूम पर कई गोले दागे गए।

हमले में जहाज का प्रोपल्शन (इंजन) पूरी तरह ठप हो गया, जिसके बाद अमेरिकी नौसैनिकों ने उस पर कब्जा कर लिया।

जवाबी प्रहार: ओमान सागर में अमेरिकी जहाजों पर ड्रोन अटैक

ईरान ने केवल कूटनीतिक नाराजगी ही नहीं जताई है, बल्कि समंदर में जवाबी कार्रवाई भी शुरू कर दी है। ताजा खबरों के मुताबिक, तूस्का को कब्जे में लिए जाने के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने ओमान सागर में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों पर आत्मघाती ड्रोन (Suicide Drones) से हमला किया है। हालांकि, अमेरिका ने अभी तक इन हमलों से हुए नुकसान की पुष्टि नहीं की है, लेकिन तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी समुद्री संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।

शांति वार्ता से पीछे हटा ईरान?

इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (IRNA) ने पाकिस्तान में होने वाली दूसरे दौर की वार्ता को लेकर चौंकाने वाला बयान दिया है। एजेंसी ने कहा कि वार्ता की खबरें अब 'आधारहीन' नजर आ रही हैं। ईरान के मुताबिक, अमेरिका की अवास्तविक उम्मीदें और होर्मुज की नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) युद्धविराम का उल्लंघन है।

"जब तक अमेरिका अपनी बंदूक की नोक पर बातचीत करना चाहता है और हमारे बंदरगाहों की घेराबंदी जारी रखता है, तब तक किसी भी मेज पर बैठने का सवाल ही पैदा नहीं होता।" - ईरानी मीडिया का रुख

होर्मुज संकट: क्यों डरी हुई है पूरी दुनिया?

13 अप्रैल से शुरू हुई अमेरिकी नाकेबंदी ने वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मचा दिया है। होर्मुज वह संकरा रास्ता है जहां से दुनिया का 20% कच्चा तेल और LNG गुजरता है। वाशिंगटन का कहना है कि वे केवल ईरानी जहाजों को रोक रहे हैं, लेकिन ईरान की धमकी है कि अगर उसके जहाज नहीं चलेंगे, तो वह किसी भी देश के जहाज को यहां से गुजरने नहीं देगा।