BREAKING:
September 15 2026 07:47 pm

iOS 18 अपडेट से खराब हुए iPhone? भारी रिपेयर खर्च पर भारत में Apple के खिलाफ CCPA की जांच तेज

Post

टेक दिग्गज एप्पल (Apple) के लिए भारतीय बाजार में कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। केंद्र सरकार की शीर्ष उपभोक्ता नियामक संस्था केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (Central Consumer Protection Authority - CCPA) ने एप्पल के खिलाफ एक विस्तृत जांच शुरू कर दी है। पूरा मामला आईफोन के ऑपरेटिंग सिस्टम 'iOS 18' के अपडेट के बाद फोन के हार्डवेयर में आई गंभीर खराबी और उसके बाद ग्राहकों से सर्विस सेंटर्स पर वसूले गए भारी-भरकम रिपेयरिंग बिल से जुड़ा हुआ है।

नियामक का मानना है कि यदि कंपनी के आधिकारिक सॉफ्टवेयर अपडेट के कारण हैंडसेट में तकनीकी खराबी उत्पन्न होती है, तो उसका आर्थिक बोझ ग्राहकों पर डालना 'अनुचित व्यापार व्यवहार' (Unfair Trade Practice) और उपभोक्ता अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सीसीपीए ने 29 जुलाई को एप्पल को नोटिस भेजकर सूचित किया था कि मामले को उसकी जांच शाखा (Investigation Wing) को सौंप दिया गया है।

iOS 18 अपडेट के बाद आईफोन में क्या-क्या आईं तकनीकी समस्याएं?

उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण को देशभर के आईफोन यूजर्स से बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त हुई थीं। उपयोगकर्ताओं का आरोप है कि आधिकारिक iOS 18 अपडेट इंस्टॉल करने के तुरंत बाद उनके फोन में गंभीर हार्डवेयर विफलताएं देखने को मिलीं:

डिस्प्ले पर हरी, गुलाबी और सफेद लाइनें: अपडेट के बाद स्क्रीन पर अचानक 'ग्रीन लाइन' या रंगीन धारियां उभर आईं, जिससे टच और डिस्प्ले विजिबिलिटी पूरी तरह खराब हो गई।

माइक और ऑडियो सिस्टम का ठप होना: कई यूजर्स ने कॉलिंग के दौरान माइक्रोफोन के काम न करने और आवाज रिकॉर्ड न होने की शिकायत दर्ज कराई।

स्क्रीन का पूरी तरह फ्रीज होना: कुछ मॉडल्स में स्क्रीन का टच रिस्पॉन्स अचानक बंद हो गया।

जब प्रभावित ग्राहक इन समस्याओं को लेकर एप्पल के आधिकारिक सर्विस सेंटर्स पर पहुंचे, तो उन्हें भारी निराशा हाथ लगी। सर्विस सेंटर्स ने यह कहते हुए मुफ्त मरम्मत से मना कर दिया कि वारंटी केवल हार्डवेयर की खराबी को कवर करती है, सॉफ्टवेयर के कारण उत्पन्न समस्याओं को नहीं।

स्क्रीन रिपेयर के नाम पर 27,900 रुपये का बिल: सीसीपीए ने ठहराया अनुचित

सीसीपीए की जांच का मुख्य केंद्र एप्पल की ओर से वसूले जा रहे अत्यधिक मरम्मत शुल्क (Exorbitant Repair Costs) हैं। जांच दस्तावेजों में एक चौंकाने वाला उदाहरण सामने आया है, जहां iPhone 15 की खराब स्क्रीन को बदलने के लिए ग्राहक से 27,900 रुपये (लगभग 291 डॉलर) की मांग की गई। यह राशि फोन की कुल खुदरा कीमत के एक-तिहाई से भी अधिक है।

नियामक ने एप्पल को भेजे गए नोटिस में स्पष्ट कहा है कि कंपनी की अपनी लापरवाही (Software Negligence) से उत्पन्न समस्याओं के लिए ग्राहकों से हजारों रुपये वसूलना निष्पक्ष व्यापार के सिद्धांतों के विपरीत है। सीसीपीए इसे व्यक्तिगत शिकायतों के बजाय "उपभोक्ताओं के एक संपूर्ण वर्ग के अधिकारों का हनन" मानकर जांच कर रहा है।

एप्पल का पक्ष: सॉफ्टवेयर पर वारंटी न देना वैश्विक इंडस्ट्री का मानक

सीसीपीए के नोटिस का जवाब देते हुए एप्पल ने 20 अगस्त को जांचकर्ताओं को अपना औपचारिक पक्ष भेजा। एप्पल ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए तर्क दिया है कि iOS 18 में भारत के भीतर कोई प्रणालीगत तकनीकी खराबी (Systemic Issue) या सुरक्षा संबंधी खामी नहीं पाई गई है।

एप्पल ने अपने बचाव में मुख्य रूप से ये दलीलें पेश की हैं:

नो-वारंटी क्लॉज (No-Warranty Provision): कंपनी के सॉफ्टवेयर लाइसेंस एग्रीमेंट में यह पहले से स्पष्ट लिखा होता है कि सॉफ्टवेयर "बिना किसी वारंटी" (Without warranty of any kind) के उपलब्ध कराया जाता है।

ग्राहकों की पूर्व सहमति: उपयोगकर्ता जब भी कोई नया सॉफ्टवेयर अपडेट इंस्टॉल करते हैं, तो वे इन नियमों और शर्तों को स्वीकार करते हैं।

वैश्विक उद्योग मानक: एप्पल ने तर्क दिया कि सॉफ्टवेयर वारंटी से अलग रहना सिर्फ उसकी नीति नहीं है, बल्कि सैमसंग और सोनी जैसी अन्य दिग्गज इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां भी इसी नीति का पालन करती हैं।

तकनीकी जोखिम का बीमा: एप्पल का कहना है कि हर सॉफ्टवेयर समस्या को वारंटी का उल्लंघन मानना सॉफ्टवेयर डेवलपर्स को हर तकनीकी जोखिम का बीमाकर्ता (Insurer against all technological risk) बनाने जैसा होगा।

शिकायतों की बेहद कम संख्या: एप्पल ने कहा कि सीसीपीए की जांच केवल 75 शिकायतों पर आधारित है, जो भारत में मौजूद करोड़ों आईफोन यूजर्स की तुलना में नगण्य है। कंपनी के अनुसार जून 2026 तक केवल 11 प्रतिशत आईफोन ही iOS 18 पर चल रहे थे।

भारतीय ग्राहकों पर क्या पड़ सकता है इस जांच का बड़ा असर?

भारतीय उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019 के तहत सीसीपीए के पास कंपनियों से दस्तावेज तलब करने, समन जारी करने और नियमों के उल्लंघन पर भारी वित्तीय जुर्माना लगाने के व्यापक अधिकार हैं।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जांच में एप्पल की वारंटी नीतियां भ्रामक या अनुचित पाई जाती हैं, तो नियामक कंपनी को निम्नलिखित कड़े कदम उठाने का आदेश दे सकता है:

प्रभावित उपभोक्ताओं को स्क्रीन और पार्ट्स की रिपेयरिंग का पूरा पैसा वापस (Refund) करना।

सॉफ्टवेयर अपडेट के चलते हार्डवेयर खराब होने पर मुफ्त स्क्रीन रिप्लेसमेंट पॉलिसी लागू करना।

सॉफ्टवेयर लाइसेंस एग्रीमेंट की शर्तों में अनिवार्य पारदर्शी बदलाव करना।

यह मामला न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक नजीर बन सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर तय करेगा कि जब किसी टेक कंपनी का अपना आधिकारिक सॉफ्टवेयर अपडेट फोन को नुकसान पहुंचाए, तो उसके हर्जाने की जिम्मेदारी ग्राहक की होगी या कंपनी की।