ईरान पर 'जंग' की जिद ने ट्रंप खेमे में मचाया हड़कंप: कट्टर समर्थक जोसेफ केंट ने छोड़ा साथ, क्या डगमगा गई पूर्व राष्ट्रपति की रणनीति...
India News Live,Digital Desk : अमेरिका की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे भरोसेमंद और कट्टर समर्थकों में शुमार जोसेफ केंट (Joe Kent) ने उनका साथ छोड़ दिया है। इस चौंकाने वाले फैसले के पीछे की वजह ईरान के खिलाफ संभावित युद्ध को लेकर ट्रंप की आक्रामक नीति बताई जा रही है। केंट के इस कदम ने न केवल रिपब्लिकन पार्टी के भीतर खलबली मचा दी है, बल्कि ट्रंप के 'अमेरिका फर्स्ट' अभियान पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।
कौन हैं जोसेफ केंट जिन्होंने ट्रंप को दिखाया आइना
जोसेफ केंट महज एक राजनेता नहीं, बल्कि अमेरिकी सेना के पूर्व 'स्पेशल फोर्सेज' अधिकारी हैं। उन्होंने युद्ध की विभीषिका को बहुत करीब से देखा है। गोल्ड स्टार पति (उनकी पत्नी की सीरिया में सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी) होने के नाते केंट हमेशा से 'अंतहीन युद्धों' (Endless Wars) के खिलाफ रहे हैं। ट्रंप के करीबी सलाहकार रहने के बावजूद केंट का मानना है कि ईरान के साथ सैन्य टकराव अमेरिका के लिए एक और आत्मघाती कदम साबित हो सकता है। उनके इस्तीफे ने यह साफ कर दिया है कि ट्रंप के अपने खेमे में भी अब युद्ध को लेकर असहमति के स्वर मुखर होने लगे हैं।
ईरान के खिलाफ युद्ध की आहट और केंट की नाराजगी
बीते कुछ दिनों से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप लगातार ईरान के खिलाफ कड़े सैन्य विकल्प अपनाने के संकेत दे रहे थे। सूत्रों की मानें तो जोसेफ केंट इसी रणनीति से नाराज थे। केंट का तर्क है कि अमेरिका को दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के बजाय अपनी आंतरिक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी ऐसे नेता का समर्थन नहीं कर सकते जो अमेरिका को एक और लंबी और बेनतीजा जंग की आग में झोंकने की तैयारी कर रहा हो।
ट्रंप की चुनावी तैयारियों को लग सकता है बड़ा झटका
जोसेफ केंट का जाना ट्रंप के लिए सिर्फ एक सलाहकार का खोना नहीं है, बल्कि यह उनके 'वेटरन' (पूर्व सैनिक) वोट बैंक में सेंध लगने जैसा है। केंट पूर्व सैनिकों और दक्षिणपंथी समर्थकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले उनका अलग होना ट्रंप की छवि को नुकसान पहुँचा सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या ट्रंप अपनी ईरान नीति में कोई बदलाव करते हैं या फिर केंट के जाने के बाद उनके तेवर और भी कड़े हो जाते हैं। फिलहाल, वाशिंगटन में जोसेफ केंट के इस साहसी फैसले की जमकर चर्चा हो रही है।