India's stance on Germany's proposal : रक्षा नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हित-आधारित
India News Live,Digital Desk : भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि रक्षा नीति और रक्षा सामग्री के स्रोत चुनने के फैसले में किसी विचारधारा (ideology) को प्राथमिकता नहीं दी जाती, बल्कि यह पूरी तरह राष्ट्रीय हित (national interest), सुरक्षा जरूरतों और सामरिक तर्क के आधार पर तय होता है। यह बात विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जर्मनी के प्रतिनिधिमंडल के दौरे और बातचीत के दौरान कही है।
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग और सैन्य उपकरणों के सह-उत्पादन (co-production) जैसी संभावनाओं पर दोनों पक्षों ने चर्चा की है। ऐसे मंचों पर सवाल उठाये गए कि क्या भारत अपनी रक्षा खरीद नीति में राजनैतिक या विचारधारा आधारित फैक्टर का उपयोग करता है। इसके जवाब में मिस्री ने स्पष्ट किया कि भारत यह निर्णय पूरे राष्ट्रीय हित, सुरक्षा ज़रूरतों, तकनीकी क्षमता और लॉजिस्टिक फ़ायदे को ध्यान में रखकर लेता है — न कि किसी वैचारिक प्रतिबद्धता से।
भारत वर्तमान में कई देशों से रक्षा उपकरण प्राप्त कर रहा है, जिसमें रूस-मूल के S-400 मिसाइल सिस्टम जैसे बड़े ऑर्डर भी शामिल हैं, और साथ ही जर्मनी के साथ पनडुब्बी निर्माण जैसे संयुक्त परियोजनाओं पर बातचीत भी चल रही है। मिस्री ने यह भी बताया कि भारत की नीति यह सुनिश्चित करती है कि डिफेंस सॉल्यूशंस वह चुनें जो “सबसे उपयुक्त” हों, और यह निर्णय अन्य देशों या विचारधाराओं पर आधारित नहीं है।
यह रुख भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और बहुपक्षीय रणनीति को रेखांकित करता है, जिसका मकसद रक्षा और असैनिक दोनों मोर्चों पर देश की प्रभावशीलता बढ़ाना है — चाहे वह रक्षा उद्योग में सहयोग हो या सुरक्षा साझेदारी का विस्तार।