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October 08 2026 11:40 pm

UN में भारत का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार: 'आतंकवाद का जो भस्मासुर तुमने पाला, आज वही तुम्हें निगल रहा'

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संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक मंच पर भारत ने एक बार फिर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के दोहरे चरित्र और उसकी सुनियोजित आतंकी नीति की धज्जियां उड़ा दी हैं। भारत के राजनयिक प्रतिनिधिमंडल ने अपने 'राइट टू रिप्लाई' के अधिकार का पूर्ण इस्तेमाल करते हुए साफ शब्दों में कहा कि जो मुल्क दशकों से अपनी सरजमीं पर आतंकवाद की नर्सरी चलाता रहा है, वह आज दुनिया के सामने खुद को पीड़ित बताने का ढोंग कर रहा है। भारतीय पक्ष ने दो टूक लहजे में दुनिया को याद दिलाया कि भारत के खिलाफ सीमाओं के पार से छद्म युद्ध छेड़ने वाला पाकिस्तान अब अपने ही बोए हुए कांटे काटने पर मजबूर है। वैश्विक समुदाय इस बात का गवाह है कि दहशतगर्दी की फैक्ट्री चलाने वालों का अंत कभी शांतिपूर्ण नहीं हो सकता, और पाकिस्तान की वर्तमान दुर्दशा इसी का प्रत्यक्ष प्रमाण बन चुकी है।

जब भस्मासुर बन गया खुद का पाला हुआ आतंकी तंत्र

भारत ने अपने कड़े बयान में इस कड़वी हकीकत को रेखांकित किया कि आतंकवाद एक ऐसा अनियंत्रित राक्षस है जो किसी की वफादारी नहीं करता। भारत की ओर से स्पष्ट कहा गया कि पाकिस्तान ने जिस जिहादी तंत्र को पड़ोसी देशों को लहूलुहान करने के हथियार के रूप में तैयार किया था, वह अब भस्मासुर बनकर खुद अपने ही जनक को निगल रहा है। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और कबायली इलाकों से लेकर बड़े शहरों तक आए दिन होने वाले आत्मघाती हमलों का जिक्र करते हुए भारतीय राजनयिकों ने चेताया कि जब आप अपने आंगन में सांप पालते हैं तो वह सिर्फ पड़ोसी को ही नहीं डसते, बल्कि मौका मिलते ही अपने पालने वाले की गर्दन पर भी वार करते हैं। आज पाकिस्तान में सुरक्षा बलों और नागरिकों पर हो रहे लगातार हमले यह साबित करने के लिए काफी हैं कि आतंक की आग अब उसी की सीमाओं को जला रही है।

अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने पाकिस्तान के पाखंड का पर्दाफाश

राजनयिक मोर्चे पर भारत ने पाकिस्तान की उस पुरानी चाल को भी बेनकाब किया जिसके तहत वह अपनी आंतरिक विफलताओं, ध्वस्त अर्थव्यवस्था और राजनीतिक अस्थिरता से जनता का ध्यान भटकाने के लिए हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर का अलाप राग अलापने लगता है। भारतीय प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं और हमेशा रहेंगे। पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय बैठकों में दुष्प्रचार करने के बजाय अपने कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों के हनन और अपने मुल्क में चरमपंथियों को दी जा रही पनाह पर जवाब देना चाहिए। भारत ने दोहराया कि जब तक इस्लामाबाद सीमा पार से होने वाली घुसपैठ, वित्तीय मदद और आतंकियों के सुरक्षित पनाहगाहों को पूरी तरह नष्ट नहीं करता, तब तक उसके किसी भी दावे पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

आतंक के वित्तपोषण और वैश्विक सुरक्षा पर भारत का अडिग रुख

भारत ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी तंत्र और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के नियमों की याद दिलाते हुए दुनिया को आगाह किया कि गुड टेररिज्म और बैड टेररिज्म जैसी कोई अवधारणा नहीं होती। आतंकवाद केवल मानवता का दुश्मन है और इसका कोई मजहब या औचित्य नहीं हो सकता। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सवाल उठाया कि वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित दर्जनों आतंकी संगठन और संयुक्त राष्ट्र की ब्लैकलिस्ट में शामिल कुख्यात सरगना आज भी पाकिस्तानी धरती पर खुलेआम घूम रहे हैं और राज्य प्रायोजित सुरक्षा का लाभ ले रहे हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को केवल बयानों तक सीमित रहने के बजाय आतंक की फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने वाले देशों के खिलाफ सख्त आर्थिक और कूटनीतिक कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि दक्षिण एशिया सहित पूरी दुनिया को इस खतरे से बचाया जा सके।

क्षेत्रीय शांति का सच्चा रास्ता: नीतिगत बदलाव या सर्वनाश?

अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में भारत ने संदेश दिया कि क्षेत्रीय शांति, समृद्धि और सहयोग की राह केवल आतंकवाद के मुकम्मल खात्मे से ही गुजरती है। भारत सदैव अपने सभी पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक संबंध चाहता है, लेकिन यह शांति राष्ट्रीय सुरक्षा और निर्दोष नागरिकों की जान की कीमत पर कभी नहीं हो सकती। यदि पाकिस्तान सचमुच अपने देश को आर्थिक तबाही, सामाजिक विघटन और गृहयुद्ध जैसी परिस्थितियों से बचाना चाहता है, तो उसे भारत विरोधी एजेंडा और राज्य प्रायोजित आतंक की आत्मघाती नीति को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा। अन्यथा, जिस आग को उसने दूसरों के घरों को जलाने के लिए जलाया था, वह भड़कते-भड़कते अंततः उसके अपने पूरे वजूद को ही राख कर देगी।