भारतीय शेयर बाजार में चौथे दिन गिरावट, सेंसेक्स 750 अंक लुढ़का

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India News Live,Digital Desk : भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन भी उथल-पुथल जारी है। बाजार में सुधार न होने के कारणों को लेकर निवेशक चिंतित हैं। दरअसल, गुरुवार को भी बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। सेंसेक्स लगभग 200 अंकों की गिरावट के साथ खुला और धीरे-धीरे बिकवाली का दौर शुरू हो गया। दोपहर 3:15 बजे सेंसेक्स 750 अंक गिरकर 84,200 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 260 अंक गिरकर 25,900 पर आ गया। 

तेल और धातु क्षेत्र के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव है, जिसमें हिंडाल्को के शेयर 3.77 प्रतिशत, ओएनजीसी के शेयर 3.12 प्रतिशत और जियो फाइनेंस के शेयर 3 प्रतिशत नीचे गिर गए हैं।

इस विधेयक का उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।

भारत रूस से तेल खरीदने वाला एक प्रमुख देश रहा है। कच्चे तेल का आयात रूस के कुल आयात का 30% से अधिक है। इसी बीच, अमेरिका में 'रूस प्रतिबंध अधिनियम 2025' नामक एक नया विधेयक पेश किया गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे एक बड़ा कदम बता रहे हैं। इस विधेयक का उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।

ट्रंप की टैरिफ़ लगाने की धमकी से किसे नुकसान हो रहा है?

इसके तहत, रूस से तेल, गैस या अन्य ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाया जा सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, यह शुल्क 500% तक पहुंच सकता है। इससे मुख्य रूप से भारत, चीन और ब्राजील प्रभावित हो सकते हैं।

यदि अमेरिका 500% टैरिफ लगाता है, तो इसका मतलब अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर भारी शुल्क लग सकता है, जिससे अमेरिका में भारतीय उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं और व्यापार को नुकसान हो सकता है। हालांकि, भारतीय सरकार ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

विदेशी निवेशकों द्वारा बिक्री भी एक प्रमुख कारण है।

इसके अलावा, अन्य प्रमुख वैश्विक बाजारों का कमजोर प्रदर्शन भी एक कारण है। जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक काफी गिर रहे हैं। बुधवार को अमेरिकी बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए, जो बढ़ती वैश्विक चुनौतियों का संकेत है। तीसरा प्रमुख कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) द्वारा शेयरों की लगातार बिक्री है। जनवरी की शुरुआत में ही विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इससे भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ा है और निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। हालांकि, कुछ ही दिनों में भारतीय कंपनियां अपने तीसरी तिमाही के नतीजे घोषित करना शुरू कर देंगी, जिससे बाजार का माहौल बदल सकता है।