भारतीय नौसेना की बढ़ी ताकत: INS अरिदमन और युद्धपोत 'तारागिरी' बेड़े में शामिल; समंदर में भारत का 'त्रिशूल' हुआ और भी घातक
India News Live,Digital Desk : भारतीय नौसेना के इतिहास में शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026 का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापट्टनम में आयोजित एक भव्य समारोह में तीसरी स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी INS अरिदमन (INS Aridhaman) और अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट तारागिरी (Taragiri) को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल कर दिया।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने गर्व से कहा, "यह केवल शब्द नहीं, बल्कि शक्ति है।" इन दो महाशक्तिशाली प्लेटफॉर्म्स के शामिल होने से हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में भारत की सामरिक पकड़ और 'मेक इन इंडिया' का संकल्प और भी मजबूत हुआ है।
INS अरिदमन: समंदर का 'अदृश्य शिकारी'
INS अरिदमन अरिहंत श्रेणी की तीसरी परमाणु शक्ति वाली पनडुब्बी (SSBN) है। इसे प्रोजेक्ट ATV के तहत विशाखापट्टनम में पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
परमाणु मारक क्षमता: यह पनडुब्बी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस है, जो भारत की 'न्यूक्लियर ट्रायड' (जमीन, हवा और पानी से परमाणु हमला करने की क्षमता) को पूर्णता प्रदान करती है।
सामरिक महत्व: चीन और पाकिस्तान की समुद्री हरकतों पर नजर रखने और 'सेकंड स्ट्राइक' (परमाणु हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई) के लिए यह भारत का सबसे अचूक हथियार है।
स्वदेशी तकनीक: अरिहंत और अरिघाट के बाद अरिदमन का शामिल होना भारत की उन्नत इंजीनियरिंग और परमाणु तकनीक में आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
युद्धपोत 'तारागिरी': रडार की नजरों से बचने वाला योद्धा
प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित तारागिरी एक घातक स्टील्थ फ्रिगेट है, जिसे मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने तैयार किया है।
स्टील्थ क्षमता: इसका डिजाइन ऐसा है कि यह रडार की पकड़ में बहुत कम आता है। 6,670 टन वजनी यह जहाज दुश्मन की नजरों से बचकर हमला करने में माहिर है।
75% स्वदेशी: इस युद्धपोत के निर्माण में 75% से अधिक सामग्री स्वदेशी है, जिसमें 200 से अधिक MSMEs का योगदान है।
हथियार प्रणाली: यह सुपरसोनिक सतह से सतह मिसाइल, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल और उन्नत एंटी-सबमरीन वॉरफेयर सिस्टम से लैस है।
मल्टी-मिशन प्रोफाइल: यह केवल युद्ध के लिए ही नहीं, बल्कि आपदा राहत (HADR) और कूटनीतिक मिशनों के लिए भी पूरी तरह सक्षम है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलेंगे समीकरण
तारागिरी और अरिदमन का कमीशन ऐसे समय में हुआ है जब पूर्वी समुद्री तट पर सामरिक चुनौतियां बढ़ रही हैं।
CODOG प्रोपल्शन: तारागिरी में लगा हाई-स्पीड इंजन इसे लंबी दूरी के अभियानों के लिए दुनिया के सबसे आधुनिक युद्धपोतों की कतार में खड़ा करता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा: भारत अब हिंद महासागर में न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम है, बल्कि पड़ोसी मित्र देशों के लिए 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' की भूमिका भी मजबूती से निभाएगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन कमीशनिंग को आत्मनिर्भर भारत की बड़ी जीत बताते हुए नौसेना के बेड़ा विस्तार कार्यक्रम की सराहना की। अब भारतीय नौसेना के पास तीन परमाणु पनडुब्बियों की ताकत है, जो दुश्मनों के मन में खौफ पैदा करने के लिए काफी है।