चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: वोटिंग के दिन मिलेगी 'पेड हॉलिडे', छुट्टी लेने पर नहीं कटेगी सैलरी
India News Live,Digital Desk : लोकतंत्र के महापर्व में मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक घोषणा की है। आगामी विधानसभा चुनावों और उपचुनावों के मद्देनजर आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान के दिन सभी सरकारी, निजी और दिहाड़ी कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश (Paid Holiday) दिया जाएगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि वोट डालने के लिए छुट्टी लेने पर किसी भी कर्मचारी की सैलरी नहीं काटी जाएगी।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत अधिकार
चुनाव आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135B का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी व्यवसाय, व्यापार, औद्योगिक उपक्रम या प्रतिष्ठान में कार्यरत हर व्यक्ति, जो मतदान का हकदार है, उसे उस दिन छुट्टी पाने का कानूनी अधिकार है।
किन्हें मिलेगा लाभ: इसमें नियमित कर्मचारियों के साथ-साथ कैज़ुअल (Casual) और दिहाड़ी मजदूर भी शामिल हैं।
बाहरी कर्मचारी भी शामिल: यदि कोई मतदाता अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर किसी दूसरे शहर के औद्योगिक संस्थान में काम कर रहा है, लेकिन वह उस क्षेत्र का पंजीकृत मतदाता है जहाँ चुनाव हो रहे हैं, तो वह भी सवैतनिक छुट्टी का हकदार होगा।
इन राज्यों और तारीखों पर लागू होगा नियम
यह घोषणा आगामी विधानसभा चुनाव और उपचुनावों वाले क्षेत्रों के लिए की गई है:
विधानसभा चुनाव: असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल।
उपचुनाव (8 सीटें): गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड और त्रिपुरा।
मतदान की महत्वपूर्ण तिथियां:
9 अप्रैल 2026: असम, केरल, पुडुचेरी, गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा।
23 अप्रैल 2026: तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र।
23 अप्रैल (चरण 1) और 29 अप्रैल (चरण 2): पश्चिम बंगाल।
विशेष नोट: इन सभी चुनावों के नतीजे 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे।
नियमों का उल्लंघन करने पर लगेगा जुर्माना
चुनाव आयोग ने सख्त चेतावनी जारी की है कि जो भी नियोक्ता (Employer) इन नियमों का उल्लंघन करेगा या मतदान के लिए छुट्टी मांगने पर कर्मचारी की सैलरी काटेगा, उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। आयोग ने सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को निर्देश दिया है कि वे इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
स्वतंत्र मतदान सुनिश्चित करने की पहल
आयोग का मानना है कि अक्सर काम के दबाव या आर्थिक नुकसान (सैलरी कटने) के डर से मजदूर और कर्मचारी वर्ग वोट डालने नहीं जा पाते। इस फैसले से सभी मतदाता बिना किसी मानसिक या आर्थिक बोझ के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे औद्योगिक क्षेत्रों और निजी कंपनियों में इस नियम की निगरानी करें।