'टैरिफ लगा दूंगा वरना...'डोनाल्ड ट्रंप ने फिर अलापा भारत-पाक युद्ध रुकवाने का राग; दावों पर भारत ने दिया करारा जवाब

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India News Live,Digital Desk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी 'सेल्फ ब्रांडिंग' और चौंकाने वाले बयानों के लिए जाने जाते हैं। एक बार फिर उन्होंने भारत का नाम लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच छिड़ने वाले भीषण परमाणु युद्ध को उन्होंने केवल एक 'धमकी' से रोक दिया था। हालांकि, भारत ने ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए हकीकत बयां की है।

ट्रंप का दावा: 'मेरे एक फोन और टैरिफ की धमकी से रुकी जंग'

डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी तारीफों के कसीदे पढ़ते हुए कहा कि वे अब तक दुनिया के आठ बड़े युद्ध रुकवा चुके हैं। भारत-पाकिस्तान के संदर्भ में उन्होंने कहा, "दो परमाणु शक्ति संपन्न देश एक-दूसरे के सामने थे। 11 विमान गिराए जा चुके थे और करोड़ों लोगों की जान खतरे में थी। मैंने दोनों देशों से कहा कि अगर लड़ना बंद नहीं किया, तो मैं तुम पर इतना टैरिफ (आयात शुल्क) लगा दूंगा कि तुम बिजनेस नहीं कर पाओगे। इस धमकी के बाद ही दोनों देश पीछे हटे।" ट्रंप ने यहाँ तक कह दिया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उन्हें शुक्रिया कहा और माना कि ट्रंप ने 5 करोड़ लोगों की जान बचाई है।

ऑपरेशन सिंदूर: जब भारत ने पाकिस्तान को घर में घुसकर मारा

ट्रंप जिस युद्ध की बात कर रहे हैं, वह दरअसल 'ऑपरेशन सिंदूर' था। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में घुसकर दर्जनों आतंकी कैंपों को नेस्तनाबूद कर दिया था। इस ऑपरेशन में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे और पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को भारी नुकसान पहुँचा था। 4 दिनों तक भारतीय सेना की मार झेलने के बाद पाकिस्तान पूरी तरह टूट चुका था।

भारत का दो-टूक जवाब: 'किसी के कहने पर नहीं, अपनी मर्जी से रोका ऑपरेशन'

भारत सरकार ने ट्रंप के 'मध्यस्थता' वाले दावों को कोरी गपशप करार दिया है। विदेश मंत्रालय और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में स्पष्ट किया था कि भारत ने किसी तीसरे देश के दबाव या परामर्श पर सैन्य कार्रवाई नहीं रोकी थी।

सच्चाई क्या है?: भारत के अनुसार, पाकिस्तान की सेना जब पूरी तरह पस्त हो गई, तो वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धविराम के लिए गिड़गिड़ाने लगा।

DGMO स्तर की वार्ता: अंततः दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच हुई सीधी बातचीत के बाद 10 मई को सीजफायर पर सहमति बनी थी।

नोबेल शांति पुरस्कार की चाहत?

ट्रंप के इन दावों के पीछे 'नोबेल शांति पुरस्कार' की उनकी पुरानी इच्छा को भी जोड़कर देखा जा रहा है। ट्रंप ने बातों-बातों में यह भी कहा कि कई देशों ने उनके लिए नोबेल कमेटी को पत्र लिखे हैं। हालांकि, भारतीय कूटनीतिज्ञों का मानना है कि ट्रंप अमेरिकी जनता के सामने खुद को एक 'महान संकटमोचक' दिखाने के लिए भारत जैसे मजबूत देश का नाम इस्तेमाल कर रहे हैं।