"ईरान की सारी पाइपलाइनें कर दूंगा तबाह", विदेश मंत्री के रूस दौरे पर भड़के ट्रंप; दिया केवल 3 दिन का अल्टीमेटम

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India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया में तनाव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची की अचानक हुई रूस यात्रा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गुस्से को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। ट्रंप ने अब तक की सबसे सीधी और भयानक चेतावनी देते हुए ईरान को केवल 3 दिन का समय दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर तय समय में समझौता नहीं हुआ, तो ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली तेल पाइपलाइनों को मटियामेट कर दिया जाएगा।

पुतिन से नजदीकी पर आगबबूला हुए ट्रंप

ईरान के विदेश मंत्री अराघची पहले पाकिस्तान गए और वहां से सीधे रूस के लिए रवाना हो गए, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति पुतिन से होनी है। ट्रंप को ईरान का यह 'रूस कार्ड' रास नहीं आया। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, "अगर 3 दिन में ईरान समझौता नहीं करता, तो उसकी पाइपलाइनों में ऐसे विस्फोट होंगे कि वह दोबारा उन्हें खड़ा नहीं कर पाएगा। ईरान दुनिया में एक बूंद तेल निर्यात करने के लायक भी नहीं बचेगा।"

"पाकिस्तान जाने का सवाल ही नहीं, अब फोन पर होगी बात"

ट्रंप ने मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान में होने वाली चर्चाओं से अपने हाथ खींच लिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर अब इस्लामाबाद नहीं जाएंगे। ट्रंप के इस सख्त रुख की प्रमुख वजहें ये हैं:

समय की बर्बादी: ट्रंप के अनुसार, बड़े प्रतिनिधिमंडलों के आने-जाने में बहुत समय खराब होता है।

सीधा संपर्क: ट्रंप ने कहा कि ईरान जब चाहे उन्हें फोन कर सकता है, अब 'टेलीफोनिक डिप्लोमेसी' ही चलेगी।

नया प्रस्ताव: ईरान ने एक लिखित प्रस्ताव भेजा था जिसे ट्रंप ने खारिज कर दिया। अब ईरान ने दूसरा प्रस्ताव भेजा है, जिसे ट्रंप 'बेहतर' बता रहे हैं।

ईरान का 'प्लान बी' और मॉस्को की भूमिका

ईरान अब अमेरिका के साथ सीधी बातचीत के बजाय रूस और ओमान के जरिए अपनी शर्तों को मनवाने की कोशिश कर रहा है। ईरानी समाचार एजेंसी 'आईएसएनए' के अनुसार, अराघची मॉस्को में युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान के अंतिम रुख और 'एग्रीमेंट फ्रेमवर्क' पर चर्चा करेंगे। 11 और 12 अप्रैल को हुई शांति वार्ता के विफल होने के बाद ईरान अब रूस के साथ मिलकर अपनी रणनीतिक बिसात बिछा रहा है।

तेल निर्यात पर 'पूर्ण नाकेबंदी' की तैयारी

ट्रंप की रणनीति अब पूरी तरह 'इकोनॉमिक वॉरफेयर' की ओर मुड़ गई है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिकी नाकेबंदी के कारण ईरान जहाजों से तेल नहीं बेच पा रहा है। अब अगर उसकी पाइपलाइनें भी उड़ा दी गईं, तो ईरान पूरी तरह से घुटनों पर आ जाएगा। ट्रंप ने धमकी दी कि यह हमला इतना जोरदार होगा कि ईरान आने वाले कई दशकों तक संभल नहीं पाएगा।