ईरान का अमेरिका को 'फाइनल' ऑफर: "पहले होर्मुज की नाकेबंदी हटाओ, तभी रुकेंगे परमाणु बम के कदम"
India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी महायुद्ध के बीच ईरान ने एक ऐसी चाल चली है, जिसने कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। पाकिस्तान के माध्यम से व्हाइट हाउस भेजे गए इस 'नए शांति प्रस्ताव' में ईरान ने साफ कर दिया है कि वह झुकने को तैयार नहीं है। ईरान ने दो टूक कहा है कि जब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से अमेरिकी नाकेबंदी नहीं हटती, तब तक परमाणु हथियारों पर कोई बातचीत नहीं होगी।
ईरान का टू-स्टेप 'पीस प्लान': क्या है नई रणनीति?
ईरान ने अपने प्रस्ताव को दो स्पष्ट चरणों (Two Stages) में बांटा है, जिसने अमेरिकी रणनीतिकारों को उलझन में डाल दिया है:
पहला चरण: अमेरिका तुरंत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अपनी नेवल ब्लॉकेड (समुद्री नाकेबंदी) हटाए और युद्धविराम लागू करे। ईरान का कहना है कि जब तक उसकी समुद्री सीमाएं आजाद नहीं होंगी, तब तक कोई भी गंभीर चर्चा संभव नहीं है।
दूसरा चरण: हालात सामान्य होने और आर्थिक प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद ईरान परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Issue) पर मेज पर बैठने को तैयार होगा। इसके साथ ही ईरान ने युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा और सुरक्षा की लिखित गारंटी भी मांगी है।
ट्रंप का रुख: "प्रतिनिधिमंडल नहीं आएगा, फोन उठाओ और बात करो"
ईरान के इस प्रस्ताव पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रवैया काफी सख्त है। ट्रंप ने अपनी टीम (जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ) को पाकिस्तान भेजने का प्लान पहले ही रद्द कर दिया है। ट्रंप का कहना है कि:
ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु बम नहीं बनाने दिया जाएगा।
अगर ईरान को बात करनी है, तो वह सीधा मुझे फोन कर सकता है।
पुराने प्रस्तावों से अमेरिका संतुष्ट नहीं है और वह ठोस कार्रवाई चाहता है।
पुतिन के साथ अराघची की 'सीक्रेट' मीटिंग
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची की सक्रियता ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है। ओमान और पाकिस्तान के ताबड़तोड़ दौरों के बाद अब अराघची रूस पहुंच चुके हैं। वहां वे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर युद्ध के नए ढांचे पर चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि ईरान रूस के जरिए अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि उसे होर्मुज में राहत मिल सके।
टकराव की स्थिति: क्यों फेल हो सकता है यह प्रस्ताव?
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह ऑफर 'डेड ऑन अराइवल' (शुरुआत में ही खत्म) हो सकता है। इसकी प्रमुख वजहें हैं:
अमेरिका की शर्त: वाशिंगटन चाहता है कि ईरान कम से कम 10 साल के लिए यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) रोक दे और अपना सारा न्यूक्लियर स्टॉक देश से बाहर भेजे।
ईरान की जिद: ईरान चाहता है कि पहले प्रतिबंध हटें, फिर परमाणु बात हो।
ट्रंप का अल्टीमेटम: ट्रंप ने हाल ही में 3 दिन का वक्त देते हुए तेल पाइपलाइनें उड़ाने की धमकी दी है, जो किसी भी समझौते की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है।