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July 23 2026 05:22 am

Jaishankar told : कैसे बदल रही दुनिया में वैश्विक कार्यबल बनेगा जरूरी

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India News Live,Digital Desk : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में कहा कि बदलती दुनिया में वैश्विक कार्यबल की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उनका कहना है कि कई देश इस तथ्य को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं कि राष्ट्रीय जनसांख्यिकी वैश्विक मांग को पूरा करने में एक बड़ी बाधा बन रही है।

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब व्यापार, टैरिफ और आव्रजन नीतियों को लेकर कई चुनौतियाँ सामने हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीज़ा पर 1,00,000 डॉलर का नया शुल्क लागू किया है, जिसका सीधा असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ने वाला है क्योंकि इस वीज़ा के अधिकांश लाभार्थी भारतीय हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा कि वैश्विक कार्यबल को अधिक अनुकूल, कुशल और समकालीन मॉडल के आधार पर तैयार करना होगा, ताकि इसे खंडित वैश्विक कार्यस्थल में स्थापित किया जा सके।

जयशंकर ने वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए चार प्रमुख रुझानों की पहचान की:

आत्मनिर्भरता

प्रौद्योगिकी अपनाना

बहुध्रुवीयता

दक्षिण-दक्षिण सहयोग

उन्होंने बताया कि इन अनिश्चितताओं के बावजूद, व्यवसाय अपने रास्ते ढूँढ रहे हैं।

भारत के डिजिटल बुनियादी ढाँचे का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बहुध्रुवीयता तभी संभव है जब राष्ट्रीय क्षमताओं का निर्माण किया जाए। जयशंकर ने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचा (DPI) का हवाला देते हुए बताया कि जब एक देश अपनी राष्ट्रीय क्षमताओं और अनुभव को विकसित करता है, तो इसका लाभ उन लोगों को भी मिलता है जो इससे जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि कई समाजों ने भारतीय DPI मॉडल को यूरोपीय या अमेरिकी मॉडलों से अधिक प्रासंगिक और अपनाने योग्य पाया है।

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि अक्सर लोग सोचते हैं कि पहला और दूसरा कार्यकाल अलग होंगे, लेकिन अनुभव बता रहा है कि समय और नीतियाँ पहले से बहुत बदल चुकी हैं। उन्होंने आगे कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दुनिया सप्लाई चेन और उत्पादन स्रोतों को लेकर चिंतित थी, लेकिन अब बाज़ार तक पहुँच की अनिश्चितता भी उतनी ही चिंता का विषय बन गई है। इसलिए अब बाज़ारों पर अत्यधिक निर्भरता उतनी ही जोखिमपूर्ण है जितनी कि सप्लाई या कनेक्टिविटी पर निर्भरता।