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July 09 2026 12:18 am

कैसे भाजपा कर सकती है 3 राज्यसभा सीटों पर क्लीन स्वीप, 2-तिहाई बहुमत से कितना दूर NDA?

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भारतीय संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का कुनबा एक बार फिर बेहद मजबूत होने जा रहा है। पश्चिम बंगाल की 3 राज्यसभा सीटों पर होने जा रहे आगामी उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की एकतरफा जीत अब पूरी तरह तय मानी जा रही है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की मुख्य वजह यह है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने इन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने से साफ इनकार कर दिया है। उनके अनुसार, विधानसभा के मौजूदा संख्या बल को देखते हुए टीएमसी किसी भी सीट को जीतने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में बिना किसी विरोध के भाजपा का इन तीनों सीटों पर क्लीन स्वीप करना बिल्कुल तय हो गया है, जिससे राज्यसभा के भीतर पूरे देश का राजनीतिक समीकरण बदलने वाला है।

आपको बता दें कि जून महीने में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद पैदा हुए बड़े राजनीतिक संकट के बीच तृणमूल कांग्रेस के तीन दिग्गज सांसदों— सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक ने उच्च सदन और पार्टी दोनों से अचानक इस्तीफा दे दिया था। इन बड़े नेताओं के इस्तीफे के बाद ही ये तीनों सीटें खाली हुई थीं, जिन पर अब चुनाव आयोग (ECI) ने आगामी 24 जुलाई को वोटिंग कराने का एलान किया है। इसके लिए 14 जुलाई तक नामांकन स्वीकार किए जाएंगे और नाम वापसी की अंतिम तिथि 17 जुलाई तय की गई है।

क्यों चुनावी रेस से पूरी तरह बाहर हुई टीएमसी? समझिए विधानसभा का पूरा गणित

अगर हम पश्चिम बंगाल विधानसभा के मौजूदा समीकरणों और आंकड़ों पर नजर डालें, तो 294 सीटों वाली इस विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास इस समय रिकॉर्ड 208 विधायकों का सीधा और मजबूत समर्थन हासिल है। राज्यसभा चुनाव के नियमों के मुताबिक, यदि भाजपा के सभी विधायक अपनी पार्टी के पक्ष में मतदान करते हैं, तो उनके पास तीनों राज्यसभा सदस्यों को बिना किसी अड़चन के आसानी से जिताने के लिए जरूरत से ज्यादा संख्या बल मौजूद है।

दूसरी तरफ, आंतरिक विद्रोह के कारण दो फाड़ हो चुकी तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को अगर मिला भी दिया जाए, तो उनके पास कुल विधायकों की संख्या महज 80 ही बैठती है। सबसे बड़ी बात यह है कि किसी भी एक गुट के पास अकेले दम पर एक राज्यसभा सांसद को चुनने के लिए जरूरी न्यूनतम जादुई आंकड़ा मौजूद नहीं है। लगभग 65 विधायकों वाले बागी गुट का नेतृत्व कर रहे विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि संख्या बल के अभाव में उम्मीदवार खड़ा करना केवल औपचारिकता होगी, इसलिए वे इस रेस से बाहर रह रहे हैं।

राज्यसभा में कितनी बढ़ जाएगी बीजेपी की ताकत? दो-तिहाई बहुमत का पूरा समीकरण

वर्तमान में पश्चिम बंगाल की कुल 13 राज्यसभा सीटों में से केवल 3 सीटों पर ही बीजेपी का कब्जा है। लेकिन, अगर भाजपा उम्मीद के मुताबिक इस उपचुनाव की तीनों सीटों को अपने पाले में कर लेती है, तो बंगाल से राज्यसभा में उसकी ताकत 3 से बढ़कर सीधे 6 हो जाएगी।

इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही उच्च सदन में भारतीय जनता पार्टी के व्यक्तिगत सांसदों की संख्या बढ़कर 117 और पूरे एनडीए (NDA) गठबंधन का कुल आंकड़ा 145 तक पहुंच जाएगा। आपको बता दें कि 245 सीटों वाली राज्यसभा में किसी भी बड़े संवैधानिक संशोधन या विधेयक को बिना रुकावट पास कराने के लिए दो-तिहाई (2/3) बहुमत यानी 162 वोटों की सख्त जरूरत होती है।

कैसे दो-तिहाई के जादुई आंकड़े को आसानी से छू लेगा एनडीए?

भले ही एनडीए की अपनी संख्या 145 तक पहुंच रही है, लेकिन रणनीतिक रूप से सरकार के पास 150 से अधिक सांसदों का सीधा और परोक्ष समर्थन माना जा रहा है। इसके अलावा, ओडिशा की बीजू जनता दल (BJD) के 5 सांसदों, 4 निर्दलीय सांसदों और राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए गए 7 नामांकित सांसदों के मजबूत समर्थन के दम पर एनडीए गठबंधन 162 के उस दो-तिहाई बहुमत के जादुई आंकड़े को बहुत आसानी से पार कर सकता है।

इस क्लीन स्वीप के बाद केंद्र सरकार के लिए संसद के उच्च सदन में महत्वपूर्ण और कड़े कानूनों को बिना किसी विपक्षी गतिरोध के पास कराना बेहद आसान हो जाएगा, जो आगामी सत्रों में देश की राजनीति को एक नई दिशा देगा।