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September 17 2026 07:34 pm

भारत में महिला शक्ति का उदय: रोजगार और उद्यमिता में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

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India News Live,Digital Desk : भारत में महिला समानता दिवस के अवसर पर जारी आँकड़े देश के लिए गौरव की बात हैं। पिछले 7 वर्षों में देश में महिलाओं की रोज़गार दर लगभग दोगुनी हो गई है, जो 2017-18 में 22% से बढ़कर 2023-24 में 40.3% हो गई है। यह बदलाव ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में देखा गया है, जहाँ महिलाएँ न केवल नौकरियों में, बल्कि उद्यमिता और स्व-रोज़गार में भी सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि भारत अब महिला-नेतृत्व वाले विकास से महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर बढ़ रहा है।

श्रम मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत में महिलाओं की रोजगार दर 7 वर्षों में 22% से बढ़कर 40.3% हो गई है, जबकि बेरोजगारी दर 5.6% से घटकर 3.2% हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह वृद्धि 96% और शहरी क्षेत्रों में 43% रही है। 1.56 करोड़ महिलाएं औपचारिक क्षेत्र में शामिल हुई हैं, और स्व-रोजगार दर भी 51.9% से बढ़कर 67.4% हो गई है। स्टार्टअप इंडिया, पीएम मुद्रा और नमो ड्रोन दीदी जैसी सरकारी योजनाएं महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रही हैं, जिसके कारण 1.92 करोड़ से अधिक महिला-नेतृत्व वाले एमएसएमई पंजीकृत हो चुके हैं।

रोज़गार में वृद्धि और बेरोज़गारी में कमी

2017-18 और 2023-24 के बीच महिलाओं की रोज़गार दर दोगुनी हो गई है। यह उपलब्धि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में देखी गई है। ग्रामीण भारत में महिलाओं की रोज़गार दर में 96% की वृद्धि हुई है, जो दर्शाता है कि सरकार की योजनाएँ और आर्थिक गतिविधियाँ छोटे गाँवों तक पहुँच रही हैं। इसी अवधि में महिलाओं में बेरोज़गारी दर भी 5.6% से घटकर 3.2% हो गई है, जो महिलाओं के लिए उपलब्ध रोज़गार के अवसरों में वृद्धि का संकेत है।

शिक्षा और औपचारिक क्षेत्र में प्रगति

महिलाओं की शैक्षिक योग्यता में सुधार से उनकी रोज़गार क्षमता भी बढ़ी है। 2013 में महिला स्नातकों की रोज़गार क्षमता 42% थी, जो अब 47.53% तक पहुँच गई है। ईपीएफओ के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 7 वर्षों में 1.56 करोड़ महिलाएं संगठित क्षेत्र के कार्यबल में शामिल हुई हैं, जो उनकी सक्रिय आर्थिक भागीदारी का प्रमाण है।

उद्यमिता और स्वरोजगार

महिलाएं अब सिर्फ़ नौकरी की तलाश में नहीं हैं, बल्कि ख़ुद नियोक्ता भी बन रही हैं। पीएलएफएस के आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 में स्व-रोज़गार दर 51.9% थी, जो 2023-24 में बढ़कर 67.4% हो गई है। स्टार्टअप इंडिया के तहत पंजीकृत 1.54 लाख स्टार्टअप्स में से 74,410 में कम से कम एक महिला निदेशक हैं। इसके अलावा, पीएम मुद्रा योजना के तहत 68% ऋण महिलाओं को दिए गए हैं और पीएम स्वनिधि योजना के 44% लाभार्थी महिलाएं हैं।

मोदी सरकार के पिछले एक दशक के कार्यकाल में महिलाओं के लिए बजट में 429% की वृद्धि हुई है। नमो द्रोण दीदी और दीनदयाल अंत्योदय योजना जैसी पहलों ने महिलाओं को नए अवसर प्रदान किए हैं। ये सभी प्रयास दर्शाते हैं कि भारत अब केवल महिला विकास पर ही केंद्रित नहीं है, बल्कि महिलाएँ स्वयं देश के विकास की रीढ़ बन रही हैं। 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, महिलाओं की 70% कार्यबल भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे देश की आधी आबादी की क्षमता का पूर्ण उपयोग हो सकेगा।

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