June 18 2026 10:07 am

चिप से लेकर शिप तक: पीएम मोदी और राष्ट्रपति ली के बीच ऐतिहासिक 15 समझौते, के-पॉप और अयोध्या का भी हुआ जिक्र

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India News Live,Digital Desk : भारत और दक्षिण कोरिया के रिश्तों में एक नए युग की शुरुआत हुई है। 8 साल के लंबे अंतराल के बाद दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे. म्युंग की भारत यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ली के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में 'चिप से लेकर शिप' तक के सफर को तय करने के लिए 15 बड़े समझौतों पर मुहर लगी है। दोनों देशों ने साल 2030 तक आपसी व्यापार को दोगुना कर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

लोकतंत्र और टेक्नोलॉजी का अनूठा संगम

हैदराबाद हाउस में हुई बैठक के बाद पीएम मोदी ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के डीएनए में लोकतांत्रिक मूल्य और कानून आधारित नियम रचे-बसे हैं। उन्होंने इस साझेदारी को 'विश्वास की भागीदारी' से 'भावी साझेदारी' में बदलने का आह्वान किया। पीएम ने स्पष्ट किया कि सेमीकंडक्टर (चिप), पोत निर्माण (शिप), एआई और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दोनों देश मिलकर काम करेंगे। दक्षिण कोरियाई कंपनियों के लिए भारत में राह आसान करने के लिए विशेष 'कोरियन इंडस्ट्रियल टाउनशिप' बनाने का भी बड़ा फैसला लिया गया है।

अयोध्या की राजकुमारी से लेकर के-पॉप तक का सफर

सांस्कृतिक रिश्तों पर बात करते हुए पीएम मोदी ने 2000 साल पुराने संबंधों को याद किया। उन्होंने अयोध्या की राजकुमारी सूरीरत्ना और कोरिया के राजा किम-सुरो की विरासत का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे दोनों देश सदियों से जुड़े हैं। पीएम ने आधुनिक दौर के सांस्कृतिक प्रभाव पर कहा, "आज भारत के युवाओं में के-पॉप (K-Pop) और के-ड्रामा का जबरदस्त क्रेज है, वहीं दक्षिण कोरिया में भारतीय सिनेमा की लोकप्रियता बढ़ रही है।" रिश्तों को और प्रगाढ़ करने के लिए साल 2028 में 'भारत-दक्षिण कोरिया फ्रेंडशिप फेस्टिवल' मनाने की घोषणा भी की गई।

इन 15 समझौतों से बदलेगी व्यापार की तस्वीर

बैठक के दौरान पोत निर्माण, इस्पात आपूर्ति श्रृंखला, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME), और डिजिटल ब्रिज जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एमओयू साइन किए गए। आर्थिक सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए 'आर्थिक सुरक्षा वार्ता' शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा, दक्षिण कोरिया ने भारत के 'इंडो-पैसिफिक ओशियन इनिशिएटिव' और 'इंटरनेशनल सोलर एलायंस' में शामिल होने का भी ऐलान किया। जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों को लेकर हुए समझौते भविष्य में दोनों देशों के नागरिकों के लिए वित्तीय और पर्यावरणीय सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।