BREAKING:
September 08 2026 06:34 pm

बांग्लादेश: हाईकोर्ट से हिंदू अधिकार नेता चिन्मय दास को मिली दो और मामलों में जमानत, फिर भी सलाखों के पीछे ही रहेंगे

Post

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के अधिकारों और सुरक्षा के लिए मुखर आवाज उठाने वाले हिंदू संन्यासी चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी (Chinmoy Krishna Das) को कानूनी मोर्चे पर आंशिक राहत मिली है, लेकिन उनकी जेल से रिहाई की राह अब भी कांटों भरी बनी हुई है। बांग्लादेश के हाईकोर्ट ने रविवार को तोड़फोड़, हमले और सरकारी काम में बाधा डालने से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में चिन्मय दास को नियमित जमानत दे दी। इसके साथ ही उनके खिलाफ दर्ज कुल छह आपराधिक मामलों में से चार मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है। हालांकि, इस अदालती राहत के बावजूद उनके तुरंत जेल से बाहर आने के आसार पूरी तरह खत्म हैं, क्योंकि उनके खिलाफ देशद्रोह (Sedition) का मामला अब भी विचाराधीन है और एक सरकारी वकील की हत्या से जुड़े गंभीर मामले की सुनवाई तेज गति से चल रही है।

हाईकोर्ट की बेंच ने दी दो मामलों में जमानत

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यायमूर्ति केएम जाहिद सरवर और न्यायमूर्ति शेख अबू ताहिर की दो सदस्यीय हाईकोर्ट बेंच ने चिन्मय दास की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। चिन्मय दास के वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने बताया कि जिन दो मामलों में उन्हें ताजा जमानत मिली है, वे मुख्य रूप से पुलिस पर हमले, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और शांति भंग करने के आरोपों से संबंधित थे। इससे पहले पिछले महीने भी अदालत ने तोड़फोड़ और अशांति फैलाने के दो अन्य मामलों में उन्हें राहत दी थी। वकील के मुताबिक, छह मामलों में से चार में जमानत हासिल कर ली गई है, लेकिन तकनीकी और कानूनी कारणों से जब तक सभी मामलों में जमानत नहीं मिल जाती, वे जेल से रिहा नहीं हो सकते।

क्यों टली रिहाई: देशद्रोह और वकील की हत्या का केस बना रोड़ा

चिन्मय दास की रिहाई के आड़े दो सबसे बड़े और पेचीदा मामले आ रहे हैं:

देशद्रोह का मुख्य मामला (Sedition Case): चिन्मय दास को मूल रूप से नवंबर 2024 में ढाका हवाई अड्डे से उस वक्त गिरफ्तार किया गया था, जब उन पर एक रैली के दौरान बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान और देशद्रोह का आरोप लगाया गया था। इस मामले में उनकी जमानत पर फिलहाल रोक (Stay) लगी हुई है।

वकील सैफुल इस्लाम अलिफ हत्याकांड: चिन्मय दास की गिरफ्तारी के बाद चट्टोग्राम कोर्ट परिसर के बाहर उनके समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच भारी हिंसक झड़पें हुई थीं। इस हिंसा के दौरान सरकारी अभियोजक (प्रॉसीक्यूटर) सैफुल इस्लाम अलिफ की नृशंस हत्या कर दी गई थी। इस मामले की सुनवाई चट्टोग्राम स्पीडी ट्रायल ट्रिब्यूनल में चल रही है, जिसमें अभी तक चिन्मय दास को कोई जमानत नहीं मिली है।

उनके कानूनी सलाहकारों का कहना है कि जब तक देशद्रोह और इस हत्याकांड वाले केस में अदालत की मुहर नहीं लग जाती, तब तक उनका जेल की सलाखों से बाहर निकलना नामुमकिन है।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग और भारत-बांग्लादेश तनाव

चिन्मय कृष्ण दास, जो पहले इस्कॉन (ISKCON) से जुड़े रहे हैं, वर्तमान में 'बांग्लादेश सम्मिलित सनातन जागरण जोत' के प्रमुख प्रवक्ता हैं। अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं, मंदिरों और अल्पसंख्यक प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों के खिलाफ उन्होंने देशव्यापी रैलियों का नेतृत्व किया था। उन्होंने अंतरिम सरकार से अल्पसंख्यक सुरक्षा कानून, त्वरित सुनवाई न्यायाधिकरण और अल्पसंख्यक मामलों के लिए अलग मंत्रालय बनाने की मांग रखी थी।

उनकी गिरफ्तारी के बाद से ही भारत ने इस घटनाक्रम पर "गहरी चिंता" व्यक्त करते हुए मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार से बांग्लादेश में हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों के जीवन, संपत्ति और अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया था। चिन्मय दास की कानूनी टीम ने अंतरिम सरकार पर आरोप लगाया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव के कारण उनकी जमानत और रिहाई की प्रक्रिया को जानबूझकर धीमा किया जा रहा है।