'हिमंता' का डर और 'मालदार' डीके का दांव: कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन
India News Live,Digital Desk :कर्नाटक की सियासत में गुरुवार को एक बड़ा अध्याय पलटा है। दिग्गज समाजवादी नेता सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस आलाकमान के इस फैसले के साथ ही अब डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। इस नेतृत्व परिवर्तन को लेकर राजनीतिक गलियारों में न केवल चर्चाएं हैं, बल्कि इसके पीछे की 'इनसाइड स्टोरी' को लेकर अलग-अलग तर्क दिए जा रहे हैं।
'हिमंता बिस्वा सरमा' वाला डर
सियासी जानकारों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण कांग्रेस का वह डर है जो उसे असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के पार्टी छोड़ने के बाद से सता रहा है। माना जा रहा है कि डीके शिवकुमार की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं और पार्टी के भीतर उनके रसूख को देखते हुए आलाकमान ने यह रिस्क नहीं लिया कि वे भी किसी 'हिमंता' की तरह बगावत कर पार्टी छोड़ दें या भाजपा का रुख कर लें। कांग्रेस के लिए डीके शिवकुमार का साथ रहना सत्ता के साथ-साथ पार्टी की मजबूती के लिए भी अनिवार्य है।
पूंजीपति बनाम समाजवादी चेहरा
नेतृत्व परिवर्तन की इस तस्वीर में वैचारिक विरोधाभास भी साफ दिख रहा है। सिद्धारमैया 'जनता परिवार' से निकले एक प्रतिबद्ध समाजवादी नेता रहे हैं, जिनकी पकड़ 'अहिंदा' (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित) वर्ग के बीच बहुत मजबूत है। इसके विपरीत, डीके शिवकुमार एक 'पूंजीपति' और बेहद सक्षम रणनीतिकार के रूप में जाने जाते हैं। चुनावी हलफनामे के अनुसार 1400 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के मालिक डीके शिवकुमार, कांग्रेस के लिए उस 'फाइनेंशियल मैनेजमेंट' की जरूरत भी पूरा करते हैं, जो आज की चुनावी राजनीति में अपरिहार्य हो गई है।
सिद्धारमैया का 'मास्टरस्ट्रोक': जाते-जाते खेला जाति जनगणना का दांव
सिद्धारमैया ने अपने इस्तीफे के ठीक पहले जाति जनगणना (Caste Census) रिपोर्ट को स्वीकार करके एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। उनके इस कदम को पिछड़े वर्ग की राजनीति को धार देने की कोशिश माना जा रहा है। रिपोर्ट में पिछड़ों का कोटा 32% से बढ़ाकर 51% करने का सुझाव दिया गया है। विश्लेषकों का कहना है कि यह सिद्धारमैया का अपने राजनीतिक करियर का एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक है, जो आने वाले चुनावों में कांग्रेस के लिए सामाजिक समीकरणों के रूप में एक बड़ी चुनौती या अवसर बन सकता है।
कांग्रेस की मजबूरी और चुनावी रणनीति
पार्टी के सामने 2028 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव की बड़ी चुनौती है। राज्य में बढ़ती सत्ता विरोधी लहर को काटने के लिए कांग्रेस को एक 'मजबूत और संसाधन संपन्न' चेहरे की जरूरत थी। 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स' में माहिर और संकट के समय पार्टी को बचाने वाले डीके शिवकुमार, कांग्रेस के लिए फिलहाल सबसे 'मुनासिब' विकल्प नजर आ रहे हैं।
हालांकि, सिद्धारमैया का इस्तीफा जिस तरह से दबाव में और बिना किसी औपचारिक उत्तराधिकारी के नाम का उल्लेख किए हुआ है, वह कर्नाटक कांग्रेस में भविष्य के लिए किसी नए 'पटाखे' (राजनीतिक हलचल) के संकेत भी दे रहा है।