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September 24 2026 06:27 pm

लखनऊ में 'ग्रीन गैस' वाला गैंग सक्रिय: बिल अपडेट के नाम पर 30 दिन में 5 करोड़ ठगे, साइबर पुलिस ने जारी किया बड़ा अलर्ट

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर अपराधियों ने ऑनलाइन ठगी का एक नया और बेहद खतरनाक तरीका खोज निकाला है। बिजली बिल के नाम पर फर्जीवाड़े के बाद अब शातिर जालसाज 'ग्रीन गैस' (Green Gas Limited) के कनेक्शन धारकों को अपना सॉफ्ट टारगेट बना रहे हैं। राजधानी के पॉश इलाकों से लेकर सामान्य कॉलोनियों तक पाइप नेचुरल गैस (PNG) का इस्तेमाल करने वाले हजारों घरेलू उपभोक्ताओं को बिल बकाया और कनेक्शन काटने का डर दिखाकर निशाना बनाया जा रहा है। साइबर क्राइम सेल और पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि पिछले महज 30 दिनों के भीतर इस 'ग्रीन गैस गैंग' ने शहरवासियों के बैंक खातों से करीब 5 करोड़ रुपये उड़ा लिए हैं।

लगातार आ रही शिकायतों और ठगी के नए पैटर्न को देखते हुए लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट और यूपी साइबर सेल ने शहर के सभी पीएनजी गैस उपभोक्ताओं के लिए विशेष एडवाइजरी और हाई अलर्ट जारी किया है।

'रात 9 बजे कट जाएगा गैस कनेक्शन': डर का ऐसा खेल खेल रहे शातिर

जांच में सामने आया है कि ठगों का यह गिरोह बेहद पेशेवर तरीके से काम करता है। जालसाज सीधे उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबरों पर ग्रीन गैस कंपनी के आधिकारिक नाम से मिलते-जुलते एसएमएस या व्हाट्सएप मैसेज भेजते हैं। इस मैसेज में लिखा होता है:

"प्रिय उपभोक्ता, आपका पिछला ग्रीन गैस बिल अपडेट नहीं है। यदि आज रात 9:30 बजे तक बिल का भुगतान या सत्यापन नहीं किया गया, तो मुख्य पाइपलाइन से आपका गैस कनेक्शन काट दिया जाएगा। कनेक्शन चालू रखने के लिए तत्काल दिए गए नंबर पर गैस अधिकारी से संपर्क करें।"

रसोई में खाना पकाने के समय गैस कनेक्शन कटने के डर से अक्सर गृहणियां और बुजुर्ग हड़बड़ी में आ जाते हैं। जैसे ही उपभोक्ता मैसेज में दिए गए नंबर पर कॉल करता है, दूसरी तरफ बैठा साइबर जालसाज खुद को ग्रीन गैस का कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव या तकनीकी अधिकारी बताकर बात करता है।

'स्क्रीन शेयरिंग' और 10 रुपये के टोकन अमाउंट से खाली हो रहा पूरा खाता

ठगी का खेल तब शुरू होता है जब कथित अधिकारी उपभोक्ता से कहता है कि उनके पुराने बिल का रिकॉर्ड सिस्टम में शो नहीं कर रहा है। इसे ऑनलाइन वेरीफाई करने के बहाने ठग पीड़ित के फोन में 'एनीडेस्क' (AnyDesk), 'क्विकसपोर्ट' (TeamViewer QuickSupport) या 'रिमोट डेस्क' जैसी थर्ड-पार्टी स्क्रीन-शेयरिंग ऐप डाउनलोड करवा लेते हैं।

इसके बाद वे उपभोक्ता से कहते हैं कि फाइल अपडेट करने के लिए सिर्फ 10 रुपये या 5 रुपये का टोकन अमाउंट यूपीआई (UPI) या नेट बैंकिंग के जरिए जमा करना होगा। जैसे ही पीड़ित अपने फोन पर पेमेंट के लिए यूपीआई पिन या बैंक का पासवर्ड डालता है, स्क्रीन शेयरिंग ऐप के जरिए जालसाज वह सीक्रेट पिन और ओटीपी लाइव देख लेते हैं। चंद मिनटों के भीतर बैंक खाते से लाखों रुपये की मोटी रकम दूसरे फर्जी खातों में ट्रांसफर कर ली जाती है और फोन कट जाता है।

लखनऊ के गोमती नगर, आशियाना और इंदिरानगर में सबसे ज्यादा मामले

साइबर सेल के अधिकारियों के मुताबिक, इस गैंग का सबसे ज्यादा असर उन इलाकों में देखा गया है जहां ग्रीन गैस की पाइपलाइन सबसे पुरानी है और घर-घर में पीएनजी कनेक्शन लगे हुए हैं। लखनऊ के गोमती नगर, गोमती नगर विस्तार, आशियाना, इंदिरानगर, अलीगंज और जानकीपुरम जैसे क्षेत्रों से पिछले एक महीने में 100 से अधिक लिखित शिकायतें साइबर थानों में दर्ज हुई हैं।

कई मामलों में तो पेंशनभोगी बुजुर्गों की जीवनभर की जमा पूंजी एक झटके में साफ कर दी गई। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह गिरोह जामताड़ा, नूंह और पश्चिम बंगाल के इलाकों से ऑपरेट कर रहा है, जिन्होंने फर्जी आईडी पर सिम कार्ड और म्यूल बैंक खाते (Mule Accounts) खरीदे हुए हैं ताकि पैसे ट्रांसफर होते ही उसे तुरंत एटीएम से निकाल लिया जाए।

ग्रीन गैस लिमिटेड (GGL) की चेतावनी: कभी न करें अनजान नंबरों पर कॉल

बढ़ते मामलों को देखते हुए ग्रीन गैस लिमिटेड (GGL) प्रबंधन ने भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है कि कंपनी की ओर से किसी भी उपभोक्ता को कनेक्शन काटने की धमकी भरा व्यक्तिगत मैसेज नहीं भेजा जाता है। कंपनी ने साफ किया कि:

ग्रीन गैस का कोई भी अधिकृत प्रतिनिधि कभी भी उपभोक्ता से स्क्रीन-शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए नहीं कहता।

बिल भुगतान हमेशा कंपनी के आधिकारिक मोबाइल ऐप, अधिकृत वेबसाइट या पंजीकृत बिलिंग काउंटरों के माध्यम से ही किया जाता है।

यदि किसी उपभोक्ता का बिल बकाया भी होता है, तो कंपनी नियमानुसार लिखित नोटिस भेजती है, सीधे व्हाट्सएप मैसेज भेजकर कनेक्शन काटने की धमकी नहीं देती।

साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत क्या करें?

साइबर पुलिस ने लखनऊ के नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से आए मैसेज पर दिए गए फोन नंबर पर कॉल न करें। यदि किसी भी कारणवश कोई इस ठगी का शिकार हो जाता है, तो बिना एक मिनट गंवाए 'गोल्डन ऑवर' (पहले दो घंटे) के भीतर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि ठगी की गई रकम को जालसाज के खाते में ही होल्ड (फ्रीज) कराया जा सके। इसके अलावा नागरिक तुरंत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।