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November 05 2026 09:47 pm

मिड-डे मील पर सरकार का बड़ा यू-टर्न: 4 जिलों में अक्षय पात्र की एंट्री पर रोक, 3 हफ्ते में वापस लिया फैसला

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पश्चिम बंगाल में सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में 'प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण' (PM-POSHAN / मिड-डे मील) योजना के क्रियान्वयन को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा यू-टर्न लिया है। सरकार ने महज तीन सप्ताह पहले जारी किए गए अपने उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसके तहत राज्य के चार प्रमुख जिलों में स्कूली बच्चों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी 'अक्षय पात्र फाउंडेशन' को सौंपी गई थी।

स्कूल शिक्षा विभाग की संयुक्त सचिव पारोमिता रॉय की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, 21 अगस्त को अक्षय पात्र फाउंडेशन को दी गई मंजूरी को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया गया है। इस आदेश के बाद जिला अधिकारियों को इस प्रक्रिया पर आगे कोई भी कार्रवाई न करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

इन 4 जिलों में निरस्त हुआ फैसला, पुरानी व्यवस्था होगी बहाल

सरकार के इस ताजा आदेश का सीधा असर राज्य के चार महत्वपूर्ण जिलों पर पड़ा है:

हावड़ा

पुरुलिया

उत्तर 24 परगना (विधाननगर, दमदम और राजारहाट-न्यू टाउन क्षेत्र)

पूर्व मेदिनीपुर (नंदीग्राम-1 और नंदीग्राम-2 ब्लॉक)

मंजूरी वापस लिए जाने के बाद अब इन सभी क्षेत्रों में पहले की तरह ही स्कूलों के भीतर स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और स्कूल स्तर पर भोजन पकाने और परोसने की पुरानी व्यवस्था को बहाल रखा जाएगा।

अचानक क्यों वापस लिया गया आदेश? समझिए पर्दे के पीछे की वजहें

हालांकि शिक्षा विभाग की लिखित अधिसूचना में मंजूरी रद्द करने का कोई औपचारिक कारण दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों और स्कूल प्रमुखों के अनुसार इसके पीछे कई बड़ी व्यावहारिक और वित्तीय बाधाएं थीं:

लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे की कमी: स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, संबंधित जिलों के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में तय समय पर गर्म और ताजा भोजन पहुंचाने के लिए फाउंडेशन के पास जरूरी सेंट्रलाइज्ड किचन और डिलीवरी नेटवर्क पूरी तरह तैयार नहीं था।

अंडे और बजट का पेच: पश्चिम बंगाल में मिड-डे मील में छात्रों को उबले अंडे दिए जाने की लंबी परंपरा रही है। अक्षय पात्र द्वारा विशुद्ध शाकाहारी (प्याज-लहसुन रहित) भोजन दिए जाने के कारण छात्रों को अलग से अंडे परोसने की व्यवस्था करनी पड़ रही थी। इससे स्कूलों के लिए अलग से अंडे उबालने और वितरित करने में भारी लॉजिस्टिक्स दिक्कतें आ रही थीं। साथ ही, सप्ताह में दो दिन अलग से अंडे देने के फैसले से योजना की लागत और बजटीय दबाव काफी बढ़ गया था।

हाईकोर्ट में याचिका और विरोध: मिड-डे मील का काम गैर-सरकारी धार्मिक/सामाजिक ट्रस्टों से जुड़ी इकाइयों को सौंपे जाने के फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में भी जनहित याचिका के जरिए चुनौती दी गई थी। विपक्ष और सिविल सोसायटी संगठनों ने बच्चों के पोषण मेन्यू से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए इसे थोपे जाने वाला कदम बताया था।

कोलकाता में अन्नामृत फाउंडेशन का काम रहेगा जारी

चार जिलों में फैसला पलटने के बावजूद राजधानी कोलकाता में मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

कोलकाता नगर निगम (KMC) क्षेत्र के लगभग 500 स्कूलों में अन्नामृत फाउंडेशन द्वारा पीएम-पोषण के तहत पहले की तरह ही भोजन उपलब्ध कराया जाता रहेगा।

विवाद गहराने के बाद इस्कॉन (ISKCON) ने भी स्पष्टीकरण जारी कर कहा था कि कोलकाता या बंगाल के स्कूलों में भोजन वितरण से उसका सीधा प्रशासनिक संबंध नहीं है और अन्नामृत व अक्षय पात्र फाउंडेशन की प्रबंधन समितियां कानूनी तौर पर स्वतंत्र रूप से काम करती हैं।

प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि पंचायत और ग्रामीण स्तर पर स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं की नाराजगी और पोषण मेन्यू पर मचे सियासी घमासान को शांत करने के लिए ही सरकार ने 4 जिलों में कदम पीछे खींचने का फैसला किया है।