बंगाल में 'गुंडा राज' और दंगाइयों पर नकेल: सोमवार से लागू हुए दो कड़े कानून, CM सुवेंदु अधिकारी बोले'कम्युनिस्ट और TMC के ठगों पर लगाम लगाने के लिए था जरूरी'
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति और कानून-व्यवस्था के लिहाज से सोमवार का दिन बेहद ऐतिहासिक रहा। राज्य की भाजपा सरकार ने प्रदेश में संगठित अपराध, असामाजिक गतिविधियों और हिंसक विरोध प्रदर्शनों पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए दो नए और बेहद सख्त कानून लागू कर दिए हैं। इन कानूनों को राज्य विधानसभा द्वारा 29 जून को पारित किया गया था, जिसे अब राज्यपाल की मंजूरी के बाद सोमवार (13 जुलाई 2026) से प्रभावी कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बंगाल को अपराध मुक्त बनाने के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था।
'34 साल कम्युनिस्ट और 15 साल TMC के गुंडों ने किया राज'
नए कानूनों के लागू होने पर विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा:
"बंगाल में इन कड़े कानूनों की सख्त जरूरत थी। यहां 34 साल तक कम्युनिस्ट ठगों ने शासन किया और उसके बाद अगले 15 साल तक टीएमसी के गुंडे सत्ता में रहे। उन लोगों द्वारा फैलाए गए अराजकता के माहौल पर लगाम लगाने के लिए हमारी सरकार यह कानून लेकर आई है। विधानसभा से पास होने के बाद अब राज्यपाल ने भी इस पर मुहर लगा दी है।"
क्या हैं ये दो नए कानून?
राज्य सचिवालय 'नाबन्ना' के अनुसार, पुलिस और प्रशासन को मजबूत करने के लिए निम्नलिखित दो अधिनियम सोमवार से प्रभावी हो गए हैं:
पश्चिम बंगाल जन सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026 (Anti-Goonda Law): इसे आम बोलचाल में 'गुंडा रोधी कानून' कहा जा रहा है।
पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था अनुरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2026: यह कानून विशेष रूप से दंगाइयों और हिंसक प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए बनाया गया है।
पुलिस और जिलाधिकारियों (DM) को मिले असीमित अधिकार
इन नए कानूनों के तहत पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए फ्री-हैंड दिया गया है:
12 महीने तक बिना मुकदमे के हिरासत: यदि किसी व्यक्ति के असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने की आशंका है, तो जिलाधिकारी (DM) या पुलिस कमिश्नर उसे बिना मुकदमे के अधिकतम 1 साल (12 महीने) तक एहतियाती हिरासत में रख सकते हैं। इस आदेश की समीक्षा हाई कोर्ट के मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाला सलाहकार बोर्ड करेगा।
'गुंडा' और 'असामािजक गतिविधियों' का बढ़ा दायरा: अब केवल आदतन अपराधी ही नहीं, बल्कि संगठित गिरोह चलाने वाले, हथियारों व ड्रग्स (NDPS) की तस्करी करने वाले, अवैध रेत व कोयला खनन करने वाले और वन्यजीव से जुड़े अपराध करने वालों को भी 'गुंडा' की श्रेणी में रखा गया है।
तड़ीपार करने का अधिकार: जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर अब किसी भी संदिग्ध अपराधी को 1 साल के लिए तड़ीपार (निर्धारित क्षेत्र में प्रवेश पर रोक) कर सकेंगे। इसके अलावा सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती (Non-Bailable) होंगे, जिससे पुलिस बिना वारंट तलाशी और गिरफ्तारी कर सकेगी।
दंगाइयों की संपत्ति की नीलामी: नए संशोधन के तहत यदि किसी आंदोलन या दंगे में सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो सरकार आरोपियों की संपत्ति कुर्क (Seize) कर उसे नीलाम करेगी और नुकसान की भरपाई करेगी।
विपक्ष का आरोप: 'राजनीतिक विरोधियों को दबाने की है साजिश'
जहां एक तरफ मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का कहना है कि मौजूदा कानून अपराधों को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं थे, इसलिए कड़े कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता थी। वहीं दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इन कानूनों की तीखी आलोचना की है। विपक्ष ने इन्हें 'दमनकारी कानून' बताते हुए आरोप लगाया है कि सरकार इन प्रावधानों का दुरुपयोग अपने राजनीतिक विरोधियों और असहमति की आवाज को दबाने के लिए कर सकती है।