Google Chrome 'Spying' Controversy: क्या वाकई गूगल क्रोम आपकी जासूसी कर रहा है? 'सीक्रेट'AI डाउनलोड के दावों का सच
India News Live, Digital Desk: क्या आपका गूगल क्रोम ब्राउज़र आपकी अनुमति के बिना आपके कंप्यूटर में कुछ 'सीक्रेट' डाउनलोड कर रहा है? पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और टेक कम्युनिटी में एक चर्चा ने जोर पकड़ा है कि गूगल क्रोम एक गुप्त AI टूल डाउनलोड कर रहा है, जिससे यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। कई यूजर्स ने इसे 'जासूसी' (Spying) करार दिया है। आइए जानते हैं क्या है इस वायरल दावे की हकीकत और गूगल का इस पर क्या कहना है।
विवाद की शुरुआत: क्या है 'Gemini Self-Referential' फाइल?
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ टेक-सैवी यूजर्स ने अपने कंप्यूटर के बैकग्राउंड में गूगल क्रोम द्वारा एक फाइल डाउनलोड होते हुए देखी। इस फाइल का नाम 'Gemini Self-Referential' या इसी तरह के AI मॉडल से जुड़ा था। यूजर्स का आरोप था कि गूगल उनकी जानकारी के बिना उनके सिस्टम पर भारी-भरकम AI मॉडल इंस्टॉल कर रहा है, जो उनकी एक्टिविटी को ट्रैक कर सकता है।
क्या गूगल वाकई जासूसी कर रहा है? (दावों का सच)
इंटरनेट पर चल रहे इन दावों को विशेषज्ञों ने 'भ्रामक' बताया है। यहां समझें कि असल में क्या हो रहा है:
On-Device AI: गूगल अपने क्रोम ब्राउज़र को स्मार्ट बनाने के लिए 'On-Device AI' (जैसे Gemini Nano) का उपयोग कर रहा है। इसका मकसद जासूसी करना नहीं, बल्कि ब्राउज़र के फीचर्स जैसे 'Help Me Write' या टैब ऑर्गनाइजर को बेहतर बनाना है।
प्राइवेसी का तर्क: गूगल का कहना है कि ऑन-डिवाइस AI असल में प्राइवेसी के लिए बेहतर है। क्योंकि डेटा क्लाउड पर भेजने के बजाय आपके अपने कंप्यूटर पर ही प्रोसेस होता है, जिससे डेटा लीक होने का खतरा कम हो जाता है।
गुप्त डाउनलोड नहीं: यह कोई 'सीक्रेट' जासूसी टूल नहीं, बल्कि क्रोम के ऑटो-अपडेट का एक हिस्सा है। हालांकि, यूजर्स की नाराजगी इस बात को लेकर है कि उन्हें इसके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
यूजर्स में नाराजगी क्यों है?
भले ही यह जासूसी न हो, लेकिन यूजर्स की नाराजगी के दो मुख्य कारण हैं:
सिस्टम रिसोर्स: ये AI मॉडल काफी बड़े होते हैं और कंप्यूटर की मेमोरी (RAM) और स्टोरेज का इस्तेमाल करते हैं, जिससे पुराने कंप्यूटर धीमे हो सकते हैं।
कंसेंट (सहमति): बिना पूछे बैकग्राउंड में बड़ी फाइलें डाउनलोड करना यूजर्स को अपनी प्राइवेसी और कंट्रोल पर हमला लगता है।
अपनी प्राइवेसी को कैसे सुरक्षित रखें?
अगर आप भी इस तरह के ऑटो-डाउनलोड से चिंतित हैं, तो आप ये कदम उठा सकते हैं:
Chrome Settings: क्रोम की सेटिंग्स में जाकर 'Experimental AI' फीचर्स को डिसेबल (बंद) कर दें।
Privacy Sandbox: क्रोम की प्राइवेसी सेटिंग्स में जाकर 'Privacy Sandbox' को मैनेज करें, जो एड्स और ट्रैकिंग को कंट्रोल करता है।
Browser Update: हमेशा आधिकारिक सोर्स से ही ब्राउज़र अपडेट करें और संदिग्ध प्लगइन्स से बचें।