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July 08 2026 01:52 pm

भगवान बर्बाद कर देंगे… पूजा ने बताया, क्या हुआ जब महेश भट्ट ने फ्लश कर दी थी ओशो की माला

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मुंबई: बॉलीवुड के बेबाक फिल्ममेकर महेश भट्ट और आध्यात्मिक गुरु ओशो रजनीश (Osho Rajneesh) का रिश्ता हमेशा से ही चर्चा और विवादों में रहा है। एक समय था जब महेश भट्ट ओशो के इस कदर दीवाने थे कि वे सब कुछ छोड़कर उनके पुणे आश्रम में रहने चले गए थे। लेकिन फिर एक ऐसा वक्त आया जब उनका ओशो से भयंकर झगड़ा हुआ और उन्होंने गुस्से में आकर ओशो की दी हुई माला को अपने गले से खींचकर टॉयलेट में फ्लश कर दिया। इस एक दुस्साहस के बाद महेश भट्ट के परिवार पर जो खौफनाक संकट मंडराया, उसका पहली बार सनसनीखेज खुलासा उनकी बेटी और मशहूर एक्ट्रेस पूजा भट्ट (Pooja Bhatt) ने किया है। पूजा ने बताया कि कैसे इस घटना के बाद दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना ने उनकी मां को डराने वाला संदेश भेजा था और उनके परिवार को रातों-रात छिपने के लिए भागना पड़ा था।

विनोद खन्ना का वो खौफनाक मैसेज: 'भगवान महेश को बर्बाद कर देंगे'

पूजा भट्ट ने हाल ही में साइरस ब्रोचा के बेहद लोकप्रिय पॉडकास्ट में शिरकत की, जहां उन्होंने अपने बचपन के इस सबसे डरावने वाकये को याद किया। पूजा ने बताया कि उनके पिता रजनीश कल्ट (Rajneesh Cult) का एक बेहद सक्रिय और महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके थे। लेकिन जब उन्होंने कल्ट से बगावत की और गुस्से में ओशो की माला को कमोड में डालकर फ्लश कर दिया, तो वे रातों-रात ओशो के साम्राज्य के लिए एक 'भगोड़े' बन गए।

पूजा ने उस दौर को याद करते हुए कहा, "मुझे आज भी अच्छी तरह याद है कि उस घटना के तुरंत बाद ओशो के बड़े भक्त और अभिनेता विनोद खन्ना (Vinod Khanna) की तरफ से मेरी मां को एक बेहद डरावना मैसेज आया था। विनोद खन्ना ने कहा था— भगवान बहुत ज्यादा नाराज हैं। भगवान महेश को पूरी तरह बर्बाद कर देंगे। इस मैसेज के बाद हमारे घर में डर का माहौल बन गया था। हम सब बहुत छोटे बच्चे थे, और हमें अपनी जान बचाने के लिए आधी रात को चुपचाप पुणे के एक गुप्त और सुरक्षित घर (Safe House) में शिफ्ट किया गया था।"

'ओशो एक गुस्सैल प्रेमी की तरह थे': पूजा भट्ट ने बयां किया आश्रम का अनुभव

ओशो रजनीश के व्यवहार और कल्ट के माहौल पर बात करते हुए पूजा भट्ट ने उनकी तुलना एक पजेसिव और गुस्सैल प्रेमी से कर दी। उन्होंने कहा कि ओशो को यह बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होता था कि कोई भी व्यक्ति उनका प्रभाव क्षेत्र या आश्रम छोड़कर उनसे दूर जाने की कोशिश करे। जो कोई भी कल्ट से अलग होता था, उसे पूरी तरह से प्रतिबंधित और बहिष्कृत कर दिया जाता था। पूजा के अनुसार, ऐसा ही कुछ बाद में मां आनंद शीला (Ma Anand Sheela) के साथ भी हुआ था जब उन्होंने आश्रम छोड़ा था।

पूजा ने अपने बचपन की यादों को साझा करते हुए बताया कि वह खुद भी उस आश्रम में जा चुकी हैं और जब वह बहुत छोटी बच्ची थीं, तब उन्होंने ओशो के पैर भी छुए थे। आश्रम के अजीबोगरीब कड़े नियमों का जिक्र करते हुए पूजा ने बताया कि वहां रहने या जाने वाले किसी भी व्यक्ति को खुशबूदार शैंपू, साबुन या परफ्यूम लगाने की सख्त मनाही थी। ओशो लोगों को सूंघकर ही मुंह बना लेते थे, क्योंकि उनका मानना था कि बाहरी कृत्रिम महक से इंसानी ऑरा (Aura) दूषित हो जाता है और वह हर जगह फैल जाता है।

क्यों भड़क गए थे महेश भट्ट? कल्ट के भीतर के पाखंड से उठा था भरोसा

आखिर ऐसा क्या हुआ था कि महेश भट्ट ने ओशो की पवित्र माला को टॉयलेट में फेंक दिया? इस सवाल का जवाब खुद महेश भट्ट ने अपने पिछले इंटरव्यूज में बेहद दार्शनिक अंदाज में दिया था। उन्होंने बताया था कि जब वे आश्रम में रहकर ओशो को सुनते थे, तो उन्हें महसूस हुआ कि जो व्यक्ति बाहर से परम ज्ञान और त्याग का प्रवचन दे रहा है, उसके मन के भीतर भी आम इंसानों की तरह ही भयंकर ईर्ष्या, क्रोध और असुरक्षा की भावना भरी हुई है।

महेश भट्ट को लगा कि आश्रम का हिस्सा बनकर वे पूरी दुनिया और खुद अपने आप से एक बहुत बड़ा झूठ बोल रहे हैं। जब उनका इस पाखंड से पूरी तरह मोहभंग हो गया, तो उन्होंने इसे बेकार मानकर कल्ट को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। दिलचस्प बात यह है कि महेश भट्ट ही वो शख्स थे जिन्होंने सुपरस्टार विनोद खन्ना को ओशो के दर्शन और उनके आश्रम से रूबरू कराया था, जिसके बाद विनोद खन्ना अपने करियर के पीक पर सब कुछ छोड़कर ओशो के संन्यासी बन गए थे।

फ्लॉप फिल्मों के अवसाद से ओशो के साए तक: ऐसे शुरू हुआ था सफर

महेश भट्ट के ओशो तक पहुंचने की कहानी भी बेहद नाटकीय है। साल 1974 से 1977 के बीच के दौर में महेश भट्ट की लगातार कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह फ्लॉप हो गई थीं। इस असफलता के कारण वे गहरे मानसिक अवसाद और पर्सनल लाइफ के संकट से जूझ रहे थे। इसी मानसिक शांति की तलाश में वे पुणे स्थित ओशो रजनीश के आश्रम पहुंचे थे।

ओशो के चुंबकीय व्यक्तित्व से प्रभावित होकर महेश भट्ट ने वहां लंबा वक्त गुजारा। जैसा कि उन्होंने हाल ही में अरबाज खान के पॉडकास्ट में भी स्वीकार किया था, वे आश्रम में ओशो का खास रोब (गेरुआ चोगा) पहनकर घूमते थे और दिन में पांच बार कड़ाई से मेडिटेशन (ध्यान) किया करते थे। लेकिन कल्ट के भीतर के विरोधाभासों ने आखिरकार उन्हें एक विद्रोही बना दिया, जिसकी कीमत उनके पूरे परिवार को चुकानी पड़ी थी।