AI से लेकर न्यू टेक तक, BRICS में बनेगी संयुक्त टेक स्ट्रैटेजी; सेमीकंडक्टर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारत ने बनाया बड़ा प्लान
उभरती अर्थव्यवस्थाओं के शक्तिशाली समूह ब्रिक्स (BRICS) की चर्चा अब तक पारंपरिक रूप से व्यापार, डॉलर के विकल्प और भू-राजनीतिक समीकरणों तक ही सीमित मानी जाती थी। लेकिन भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में यह मंच एक नई करवट ले रहा है। इस बार सदस्य देशों का सबसे बड़ा फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर मिशन, न्यू टेक्नोलॉजी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) पर केंद्रित एक साझा 'BRICS Tech Strategy' तैयार करने पर है।
वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत तकनीकों पर कुछ चुनिंदा पश्चिमी टेक कंपनियों के एकाधिकार (Tech Monopolies) को संतुलित करने और ग्लोबल साउथ (Global South) को तकनीकी रूप से संप्रभु बनाने के लिए यह पहल बेहद निर्णायक मानी जा रही है। सम्मेलन में सदस्य देश न केवल शोध और डेटा साझा करेंगे, बल्कि तकनीकी क्षमताओं का आदान-प्रदान कर एक आत्मनिर्भर डिजिटल तंत्र की नींव रखेंगे।
AI और डिजिटल सर्विसेज: ग्लोबल साउथ के लिए साझा रोडमैप
सम्मेलन के उच्चस्तरीय सत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल सेवाओं को ब्रिक्स देशों के भविष्य की जीवनरेखा के रूप में रेखांकित किया गया है:
ओपन-सोर्स AI और कंप्यूट शेयरिंग: भारत के 'IndiaAI Mission' की तर्ज पर सदस्य देशों के बीच ओपन-सोर्स एआई मॉडल्स, स्थानीय भाषा डेटासेट्स और सुपरकंप्यूटिंग संसाधनों को साझा करने के लिए फ्रेमवर्क बनाया जा रहा है।
GRAIN इनिशिएटिव: शोधकर्ताओं के लिए 'ग्लोबल रिसर्च एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क' (GRAIN) के जरिए हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग (HPC) और सुपरकंप्यूटर्स का साझा एक्सेस उपलब्ध कराया जाएगा।
एथिकल और सुरक्षित AI: पश्चिमी मानकों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय ब्रिक्स देश पारदर्शी, मानवीय और भेदभाव-रहित (Bias-Free) जिम्मेदार एआई के लिए साझा नियम तैयार करेंगे।
सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: भारत की चिप पहल से जुड़ेंगे ब्रिक्स देश
ग्लोबल सप्लाई चेन में आई रुकावटों से सबक लेते हुए ब्रिक्स मंच पर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को शीर्ष एजेंडे में शामिल किया गया है।
भारत ने अपने 'सेमीकंडक्टर मिशन 2.0' का खाका सदस्य देशों के सामने पेश करते हुए उन्हें चिप डिजाइनिंग, पैकेजिंग (ATMP/OSAT) और फैब्रिकेशन में संयुक्त भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है। भारत इस क्षेत्र में अपनी तकनीकी प्रगति और इन्फ्रास्ट्रक्चर को ब्रिक्स सहयोगियों के साथ साझा करने को तैयार है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला के जोखिमों को कम किया जा सके।
स्टार्टअप और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
भारत के यूपीआई (UPI), आधार और डिजिटल आइडेंटिटी जैसे डीपीआई मॉडल ने ब्रिक्स देशों में गहरी दिलचस्पी जगाई है। तकनीक को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए कई बड़े प्रस्तावों पर मुहर लगने की तैयारी है:
BRICS Startup Innovation Fund: सदस्य देशों के शुरुआती और ग्रोथ-स्टेज डीप-टेक स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता देने के लिए साझा इनोवेशन फंड की स्थापना।
BRICS Incubator Network: सदस्य देशों के राष्ट्रीय स्टार्टअप इनक्यूबेटर्स को आपस में जोड़ना, ताकि नवोन्मेषी विचारों को अंतरराष्ट्रीय बाजार आसानी से मिल सके।
डिजिटल एग्रीकल्चर और स्मार्ट ग्रिड्स: आईआईटी दिल्ली के समन्वय में 'ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर' के तहत एआई और आईओटी (IoT) से खेती की निगरानी और डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के जरिए स्मार्ट एनर्जी ग्रिड्स का विकास किया जाएगा।
डिजिटल प्रभुत्व को संतुलित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम
ब्रिक्स के विस्तारित 11 सदस्य देशों (भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया) की यह साझा टेक रणनीति सिर्फ आर्थिक विकास का माध्यम नहीं, बल्कि डिजिटल उपनिवेशवाद से बचने का सुरक्षा चक्र भी है। यदि यह तकनीकी साझेदारी धरातल पर सफलतापूर्वक उतरती है, तो आने वाले दशक में एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और चिप निर्माण के वैश्विक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।