'मोदी को गले लगा सकते हैं पर मुझे नहीं...' राहुल गांधी के बयान पर भड़के केरल के पूर्व सीएम पिनराई विजयन
कोझिकोड/नई दिल्ली: विपक्षी दलों के 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के भीतर की अंदरूनी कलह अब खुलकर सड़कों पर आ गई है। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन ने शनिवार को कांग्रेस के शीर्ष नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। विजयन ने राहुल गांधी के राजनीतिक रवैये को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उनकी ऐसी संकीर्ण सोच से 'इंडिया' गठबंधन मजबूत होने के बजाय कमजोर हो रहा है और इसका सीधा राजनीतिक फायदा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को पहुंच रहा है।
यह पूरा विवाद 'इंडिया' गठबंधन की एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान राहुल गांधी द्वारा दिए गए उस कथित बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि केरल में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता (एलडीएफ बनाम यूडीएफ) के कारण वे वहां के पूर्व सीएम पिनराई विजयन को गले नहीं लगाएंगे।
'मोदी को गले लगाते राहुल की तस्वीर सबने देखी है': विजयन का पलटवार
माकपा (CPIM) के वरिष्ठ नेता पिनराई विजयन ने कोझिकोड में संवाददाताओं से बात करते हुए राहुल गांधी की टिप्पणी पर कड़ा ऐतराज जताया। विजयन ने बेहद तल्ख लहजे में कहा:
"मुझे इस बात से रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ता कि कौन किसे गले लगाता है और किसे नहीं। लेकिन देश की जनता ने संसद में राहुल गांधी की देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गले लगाते हुए तस्वीर देखी है। मुझे उनके मोदी को गले लगाने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन मेरे लिए उनके इस बयान के पीछे एक खास राजनीतिक संदेश छिपा है। यह टिप्पणी राहुल गांधी के संकीर्ण राजनीतिक नजरिए और 'इंडिया' गठबंधन के प्रति उनके सतही दृष्टिकोण को उजागर करती है।"
'सिर्फ हम नहीं, अखिलेश और तेजस्वी ने भी कांग्रेस को घेरा'
विजयन ने गठबंधन की बैठक के भीतर की इनसाइड स्टोरी साझा करते हुए बताया कि कांग्रेस के इस अड़ियल और मनमाने रवैये से सिर्फ वामपंथी (माकपा) ही नाराज नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि बैठक के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव समेत कई अन्य क्षेत्रीय दलों के बड़े नेताओं ने भी कांग्रेस के रुख पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं और कांग्रेस की नीतियों के खिलाफ खुलकर बात की थी।
तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी द्रमुक (DMK) का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग आज देख सकते हैं कि डीएमके किस कूटनीतिक असमंजस की स्थिति में है। उन्होंने कहा, "मौजूदा असहज हालात सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस, खासकर राहुल गांधी के अड़ियल रवैये के कारण पैदा हुए हैं। हकीकत यह है कि राहुल गांधी के इस व्यवहार से विपक्षी एकता को चोट पहुंच रही है और वे अनजाने में ऐसी परिस्थितियां पैदा कर रहे हैं जिससे सीधे तौर पर भाजपा के राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है।"
केरल चुनाव की कड़वाहट: माकपा ने मल्लिकार्जुन खरगे को लिखा था पत्र
गौरतलब है कि केरल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान भी राहुल गांधी और पिनराई विजयन के बीच बेहद तीखी जुबानी जंग देखने को मिली थी, जहां दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की नीतियों पर जमकर प्रहार किए थे।
इस बीच, माकपा के राष्ट्रीय महासचिव एम.ए. बेबी ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केरल की जमीनी राजनीतिक और सामाजिक हकीकत को देखते हुए कूटनीतिक तौर पर राहुल गांधी का पिनराई विजयन को गले लगाना वैसे भी मुमकिन नहीं था। बेबी ने खुलासा किया कि इस वैचारिक मतभेद को लेकर उन्होंने माकपा महासचिव के नाते कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को एक आधिकारिक पत्र भी लिखा था, जिसके कुछ अंश हाल ही में मीडिया में लीक हुए थे।
'राज्यों में विरोध स्वाभाविक, लेकिन राजनीतिक शालीनता न भूलें'
वामपंथी नेताओं का कहना है कि 'इंडिया' गठबंधन के गठन के समय ही यह तय हो गया था कि देश के अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियां भिन्न हैं। माकपा ने गठबंधन बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई थी और पार्टी शुरू से ही इस बात से वाकिफ थी कि कुछ राज्यों में गठबंधन सहयोगी एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे।
एम.ए. बेबी ने कहा, “भले ही कुछ राज्यों में पार्टियां राजनीतिक मजबूरियों के कारण एक-दूसरे की विरोधी हों और मंचों से आलोचना करती हों, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता दिखाने के लिए नेताओं के बीच राजनीतिक शालीनता, शिष्टाचार और गरिमा के कुछ न्यूनतम मानकों को बनाए रखना बेहद जरूरी है, जिसे कांग्रेस भूलती जा रही है।”