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September 25 2026 05:51 pm

'झूठ बोलने से असलियत बदल नहीं सकती': कश्मीर पर जहर उगलने वाले इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) को भारत ने लताड़ा

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संयुक्त राष्ट्र के मंच पर जम्मू-कश्मीर को लेकर एक बार फिर पाकिस्तान प्रायोजित दुष्प्रचार का सहारा लेने वाले इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) को भारत ने कड़े और दो टूक शब्दों में आईना दिखाया है। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के उच्चस्तरीय सत्र के दौरान भारत ने अपने 'राइट टू रिप्लाई' (जवाब देने के अधिकार) का इस्तेमाल करते हुए OIC के बयानों को सिरे से खारिज कर दिया।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग थे, हैं और हमेशा रहेंगे। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर कहा कि ओआईसी चाहे जितने भी भ्रामक और अनर्गल बयान दे ले, लेकिन बार-बार झूठ दोहराने से जमीनी हकीकत और ऐतिहासिक असलियत कभी नहीं बदल सकती।

'पाकिस्तान के दुष्प्रचार का बंधक बना OIC'

भारतीय राजनयिक ने संयुक्त राष्ट्र में भाषण देते हुए OIC के दोहरे रवैये पर जमकर प्रहार किया। भारत ने कहा कि 57 मुस्लिम बहुल देशों का यह समूह अब एक स्वतंत्र बहुपक्षीय मंच रहने के बजाय केवल पाकिस्तान के भारत विरोधी एजेंडे और प्रोपेगैंडा का औजार बनकर रह गया है।

भारतीय प्रतिनिधि ने कहा, "यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि ओआईसी ने एक बार फिर खुद को एक ऐसे देश (पाकिस्तान) के हाथों का मोहरा बनने दिया है, जिसका अपना मानवाधिकार और लोकतांत्रिक रिकॉर्ड दुनिया भर में सबसे खराब और दागदार है। OIC को किसी भी तीसरे देश के इशारे पर भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है।"

कश्मीर में रिकॉर्ड मतदान और विकास का दिया हवाला

भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने जम्मू-कश्मीर की वास्तविक तस्वीर पेश करते हुए वहां हुए हालिया ऐतिहासिक बदलावों और लोकतांत्रिक मजबूती का ब्योरा रखा:

लोकतांत्रिक भागीदारी: भारत ने रेखांकित किया कि जम्मू-कश्मीर में संपन्न हुए चुनावों में जनता ने रिकॉर्ड तोड़ मतदान कर भारतीय लोकतंत्र, संविधान और विकास की धारा में अपना अटूट विश्वास जताया है।

अलगाववाद और आतंक को नकारा: जनता की यह अभूतपूर्व भागीदारी पाकिस्तान समर्थित सीमा पार आतंकवाद, हिंसा और अलगाववाद के मुंह पर करारा तमाचा है।

आर्थिक और बुनियादी ढांचे का विकास: घाटी में पर्यटन, वैश्विक निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा और आधुनिक बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार हो रहा है, जो स्थानीय नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।

पाकिस्तान के मानवाधिकार हनन का खोला कच्चा-चिट्ठा

भारत ने OIC के मंच से भारत पर उंगली उठाने वाले पाकिस्तान को भी आड़े हाथों लिया। भारतीय पक्ष ने कहा कि जो देश अपने यहां अल्पसंख्यकों—हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों, शिया और अहमदिया समुदाय—पर लगातार अत्याचार कर रहा है और जहां बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध में जबरन गायब किए जाने (Forced Disappearances) की घटनाएं आम हैं, उसे मानवाधिकारों पर उपदेश देने का कोई हक नहीं है।

भारत ने वैश्विक मंच पर मांग की कि OIC को पाकिस्तान द्वारा गैर-कानूनी तरीके से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्रों (PoK) में मानवाधिकारों के गंभीर हनन और वहां की जनता पर हो रहे जुल्मों पर ध्यान देना चाहिए, न कि भारत के फलते-फूलते लोकतंत्र पर उंगली उठानी चाहिए।

आंतरिक मामलों से दूर रहने की सख्त चेतावनी

विदेश मंत्रालय के रुख को दोहराते हुए भारतीय मिशन ने साफ संदेश दिया कि भारत अपने संप्रभु अधिकारों, राष्ट्रीय अखंडता और नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। OIC को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने और पाकिस्तान के संकीर्ण राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए अपने मंच का दुरुपयोग तुरंत बंद करने की नसीहत दी गई।