BREAKING:
November 06 2026 09:45 pm

सपा नेत्री काजल निषाद समेत 60 पर FIR: गोंडा में विनोद साहनी का शव सड़क पर रखकर चक्काजाम करने का आरोप

Post

उत्तर प्रदेश के गोंडा में बर्तन कारोबारी विनोद साहनी की कथित पीट-पीटकर की गई हत्या के बाद उपजा सियासी और सामाजिक आक्रोश अब कानूनी कार्रवाई की जद में आ गया है। मामले में न्याय की मांग को लेकर सड़क पर उतरे लोगों का नेतृत्व करने वाली समाजवादी पार्टी (सपा) की चर्चित नेत्री काजल निषाद की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गोंडा पुलिस ने 11 सितंबर को शाहपुर भग्गन चौराहे पर मृतक विनोद साहनी का शव रखकर सड़क जाम करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और आमजन के आवागमन को बाधित करने के आरोप में काजल निषाद, राजा निषाद और 50 से 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा (FIR) दर्ज कर लिया है।

अंतिम संस्कार रुकवाकर चौराहे पर शव रखवाने का आरोप

परसपुर थाने में तैनात आरक्षी आकाश दीप की तहरीर के आधार पर पुलिस ने यह मामला दर्ज किया है। दर्ज कराई गई रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि 11 सितंबर की सुबह जब विनोद साहनी का शव लखनऊ के केजीएमयू से पोस्टमार्टम के बाद पैतृक गांव पहुंचा था, तब परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे। उसी दौरान सपा नेत्री काजल निषाद अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचीं और परिजनों को कथित तौर पर भड़काकर शव को घर से उठवा लिया। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे शव को शाहपुर भग्गन चौराहे पर रखकर चचरी-भौरिगंज मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया गया।

एंबुलेंस फंसी और राजकीय कार्य प्रभावित, वीडियो फुटेज से हो रही पहचान

पुलिस द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में इस बात का विशेष उल्लेख किया गया है कि इस चक्काजाम के कारण कई घंटों तक मुख्य मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। मार्ग अवरुद्ध होने के चलते मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस का आवागमन भी प्रभावित हुआ और स्थानीय प्रशासन का सरकारी कामकाज बाधित हुआ। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षाबलों द्वारा बनाई गई वीडियो रिकॉर्डिंग और फोटोग्राफ्स के आधार पर प्रदर्शनकारियों की पहचान की जा रही है। उपद्रव करने और कानून व्यवस्था को हाथ में लेने वाले अन्य अज्ञात लोगों को भी विवेचना के आधार पर नामजद किया जाएगा।

क्या है विनोद साहनी हत्याकांड, जिसने गरमाई यूपी की राजनीति?

गोंडा के परसपुर थाना क्षेत्र में बर्तन कारोबारी विनोद साहनी पर 9 सितंबर की रात दुकान बंद कर घर लौटते वक्त दबंगों ने जानलेवा हमला कर दिया था। गंभीर हालत में उन्हें लखनऊ के केजीएमयू रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद यूपी की राजनीति में भारी भूचाल आ गया था। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख डॉ. संजय निषाद स्वयं लखनऊ से लेकर गोंडा कलेक्ट्रेट तक धरने पर बैठ गए थे और अपनी ही सरकार के अफसरों को खरी-खोटी सुनाई थी। इसके अलावा सिराथू विधायक पल्लवी पटेल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी पीड़ित परिवार से मिलने की कोशिश की थी।

कानूनी कार्रवाई पर सपा का पलटवार: 'आवाज दबाने की कोशिश'

सपा नेत्री काजल निषाद और समर्थकों पर एफआईआर दर्ज होने के बाद समाजवादी पार्टी ने इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई करार दिया है। सपा नेताओं का कहना है कि जब एक निर्दोष पिछड़े वर्ग के कारोबारी की सरेआम हत्या कर दी जाती है और प्रशासन लापरवाही बरतता है, तो पीड़ित परिवार के साथ खड़े होकर शांतिपूर्ण न्याय मांगना कोई अपराध नहीं है। सपा ने आरोप लगाया कि प्रशासन असली अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को जवाबदेह बनाने के बजाय पीड़ित पक्ष और उनकी आवाज उठाने वाले विपक्षी नेताओं को मुकदमों के जरिए डराने का प्रयास कर रहा है।