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October 08 2026 11:38 pm

जानें घटस्थापना का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त, कलश स्थापना की सही विधि और पूरी पूजन सामग्री लिस्ट

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आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ ही सनातन परंपरा का सबसे पावन पर्व नवरात्रि आरंभ हो रहा है। शक्ति उपासना के इस महापर्व में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधिवत आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन सही नक्षत्र, सही लग्न और शुभ चौघड़िया में कलश की स्थापना करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और आरोग्य का वास होता है। शास्त्रों में घट यानी कलश को साक्षात ब्रह्मांड और त्रिदेवों का प्रतीक माना गया है, जिसमें सभी तीर्थों, तैंतीस कोटि देवी-देवताओं और मां भगवती की साक्षात उपस्थिति मानी जाती है। यही कारण है कि घटस्थापना सदैव शास्त्र सम्मत नियमों और अत्यंत सटीक मुहूर्त के भीतर ही की जानी चाहिए ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।

घटस्थापना 2026 के लिए शुभ समय और अभिजित मुहूर्त का सटीक समय

हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, प्रतिपदा तिथि के दिन प्रातःकाल सूर्योदय के उपरांत द्विस्वभाव लग्न में घटस्थापना करना सर्वश्रेष्ठ फलदायी माना गया है। प्रतिपदा तिथि के आरंभ काल में चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का त्याग करने की परंपरा है, क्योंकि इनमें कलश स्थापित करना वर्जित बताया गया है। यदि प्रातःकाल का समय किसी कारणवश छूट जाए, तो दोपहर में अभिजित मुहूर्त घटस्थापना के लिए सर्वोत्तम विकल्प होता है। अभिजित मुहूर्त को स्वयं भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त है और इस दौरान किया गया कोई भी शुभ कार्य निर्विघ्न संपन्न होता है। भक्तजनों को ध्यान रखना चाहिए कि राहुकाल के दौरान भूलकर भी कलश की स्थापना न करें, क्योंकि यह समय किसी भी नए या मांगलिक कार्य के आरंभ के लिए अशुभ माना जाता है।

घटस्थापना के लिए संपूर्ण पूजन सामग्री की प्रामाणिक सूची

विधिपूर्वक पूजन संपन्न करने के लिए सामग्री का पूर्व संकलन अत्यंत आवश्यक है ताकि अनुष्ठान के मध्य किसी प्रकार का व्यवधान न आए। पूजन के लिए शुद्ध मिट्टी या तांबे/पीतल का कलश, कलश ढकने के लिए मिट्टी या धातु का ढक्कन, पवित्र मिट्टी या बालू, सप्त धान्य (जौ, गेहूं, तिल, कंगनी, चना, मूंग और धान), बिना टूटा हुआ जटादार पानी वाला नारियल, लाल नया सूती कपड़ा या चुनरी, कलावा (मौली), गंगाजल, आम या अशोक के 5 या 7 पत्ते, रोली, चंदन, हल्दी, अक्षत (अखंडित चावल), सुपारी, लौंग, इलायची, सिक्का, इत्र, दूर्वा, धूपबत्ती, शुद्ध घी का अखंड दीपक, कपूर, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), ताजे लाल फूल व माला, माता रानी के लिए लाल चुनरी व श्रृंगार सामग्री और भोग के लिए ऋतु फल, बताशे व मिष्ठान एकत्र कर लें।

घर के ईशान कोण में कलश स्थापना की चरणबद्ध विधि

पूजा की शुरुआत करने से पहले घर के उत्तर-पूर्व कोने यानी ईशान कोण को अच्छी तरह साफ कर गंगाजल छिड़क कर पवित्र कर लें। लकड़ी की एक नई या साफ चौकी बिछाकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं और अक्षत से अष्टदल कमल बनाएं। अब एक चौड़े मुंह वाले मिट्टी के पात्र में पवित्र मिट्टी फैलाएं और उसमें सप्तधान्य या जौ के बीज समान रूप से डालकर ऊपर से हल्की मिट्टी और थोड़ा जल छिड़कें। इसके पश्चात तांबे या मिट्टी के कलश पर स्वास्तिक बनाएं और गले में मौली बांधें। कलश के भीतर शुद्ध जल और गंगाजल भरें, फिर उसमें एक सुपारी, एक सिक्का, थोड़ी दूर्वा, हल्दी की गांठ, अक्षत और इत्र डालें। कलश के मुख पर आम या अशोक के पांच या सात पत्ते इस तरह रखें कि उनका आधार जल को छुए। अब एक सूखे जटा वाले नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर मौली से बांधें और इसे पत्तों के बीचों-बीच स्थापित करें, ध्यान रहे कि नारियल का मुख सदैव साधक की ओर होना चाहिए।

अखंड ज्योति प्रज्वलन, आवाहन मंत्र और आवश्यक सावधानियां

घट की स्थापना के बाद मां शैलपुत्री और मां भगवती दुर्गा का ध्यान करते हुए कलश पर अक्षत, पुष्प और चंदन अर्पित करें। "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" अथवा "ॐ भूर्भुवः स्वः दुर्गादेव्यै नमः" मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करते हुए देवी से नौ दिनों तक घट में विराजमान रहने की प्रार्थना करें। यदि आप नौ दिनों के लिए अखंड ज्योति जला रहे हैं, तो उसे कलश के आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में रखें और संकल्प लेकर प्रज्वलित करें। घटस्थापना के दौरान मन, वचन और कर्म की शुद्धि अनिवार्य है। पूरे नौ दिनों तक कलश को हिलाना नहीं चाहिए और जौ वाले पात्र में प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा जल अर्पित करते रहना चाहिए ताकि अंकुरण हरा-भरा और घना हो। यह अंकुरण आपके घर में आने वाली सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रत्यक्ष संकेत माना जाता है।