BHU में इंतजार खत्म 4 साल बाद बनी कार्यकारी परिषद, अब तेजी से होंगे अहम फैसले

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India News Live,Digital Desk : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक, में आखिर इंतजार खत्म हुआ! करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद, अब यूनिवर्सिटी को उसकी नई कार्यकारी परिषद (Executive Council) मिल गई है। इससे अब विश्वविद्यालय में अटके हुए बड़े फैसले और विकास कार्य तेज़ी से पूरे होने की उम्मीद है।

पिछले चार साल से बीएचयू की सर्वोच्च नीति-निर्धारक इकाई, कार्यकारी परिषद, प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रही थी। इसका सीधा असर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और अकादमिक कार्यों पर पड़ रहा था। लेकिन अब जब सदस्यों के नामों को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है, तो यूनिवर्सिटी फिर से अपनी पुरानी रफ़्तार पर लौटेगी।

कार्यकारी परिषद का क्या काम होता है?

आपको बता दें कि कार्यकारी परिषद विश्वविद्यालय की गवर्निंग बॉडी होती है। यह शिक्षकों की नियुक्ति से लेकर छात्र हित से जुड़े बड़े फैसलों, नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत, वित्तीय अनुमोदन, विकास परियोजनाओं की मंजूरी और तमाम बड़े नीतिगत निर्णयों के लिए ज़िम्मेदार होती है। परिषद न होने से ये सभी कार्य रुके हुए थे।

नए सत्र में प्रवेश प्रक्रियाओं के शुरू होने और आने वाले समय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत बड़े बदलावों को देखते हुए, इस कार्यकारी परिषद का बनना बहुत महत्वपूर्ण है। अब फैकल्टी और छात्रों से संबंधित महत्वपूर्ण नीतियां समय पर बन सकेंगी।

नई कार्यकारी परिषद के लिए नियुक्त सदस्य देश के विभिन्न प्रतिष्ठित क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं, जिनमें शिक्षा, विज्ञान, कला, कानून और समाज सेवा के विशेषज्ञ शामिल हैं। इन सदस्यों का अनुभव विश्वविद्यालय के भविष्य के विकास में अहम भूमिका निभाएगा।

बीएचयू समुदाय में इस फैसले से खुशी का माहौल है। उम्मीद की जा रही है कि नई परिषद विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी और छात्रों तथा शिक्षकों के लिए एक बेहतर शैक्षणिक और शोध का माहौल तैयार करेगी।