बाजार में महाप्रलय! युद्ध के बीच भी धड़ाम हुए सोना-चांदी, मात्र 180 मिनट में स्वाहा हुए ₹166 लाख करोड़
India News Live,Digital Desk : वैश्विक अर्थव्यवस्था के इतिहास में 23 मार्च 2026 का दिन एक काले अध्याय के रूप में याद रखा जाएगा। मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच, जहां सोने और चांदी को सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता था, वहां आज 'महाविनाश' देखने को मिला है। मात्र 3 घंटे के भीतर इन कीमती धातुओं के बाजार मूल्य से 2 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 166 लाख करोड़ रुपये) भाप बनकर उड़ गए। 'द कोबेसी लेटर' के मुताबिक, यह कोई सामान्य गिरावट नहीं बल्कि एक दुर्लभ 'ऐतिहासिक लिक्विडिटी संकट' है जिसने दुनिया भर के निवेशकों की नींद उड़ा दी है।
सुरक्षित निवेश का भ्रम टूटा: 3 घंटों में मची हाहाकार
आमतौर पर युद्ध के समय निवेशक सोने की ओर भागते हैं, लेकिन इस बार पासा उल्टा पड़ गया। जब कच्चे तेल की कीमतें स्थिर थीं और अमेरिकी शेयर बाजार में बढ़त दिख रही थी, ठीक उसी समय सोने-चांदी के बाजार में 'सुनामी' आ गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट इतनी तेज थी कि निवेशकों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। 180 मिनट की ट्रेडिंग में जितनी दौलत डूबी है, उसने वैश्विक क्रेडिट मार्केट और तकनीकी कंपनियों के भविष्य पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं।
गिरावट के 3 बड़े 'विलेन': आखिर क्यों डूबा बाजार?
बाजार विश्लेषकों ने इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे तीन मुख्य कड़ियों को जोड़ा है:
बॉन्ड यील्ड का उछाल: अमेरिका में 10 साल के सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दर (यील्ड) अचानक बढ़कर 4.4% हो गई है। जब सरकारी बॉन्ड सुरक्षित और फिक्स्ड रिटर्न देने लगें, तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर वहां लगाने लगते हैं।
डॉलर की 'सुपर' मजबूती: युद्ध के इस दौर में गोल्ड के बजाय अमेरिकी डॉलर सबसे भरोसेमंद संपत्ति बनकर उभरा है। डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की चमक फीकी पड़ गई।
मार्जिन कॉल और स्टॉप-लॉस का ट्रिगर होना: कई बड़े व्यापारियों ने उधार लेकर (Leverage) भारी खरीदारी कर रखी थी। जैसे ही कीमतें गिरनी शुरू हुईं, सिस्टम में लगे 'स्टॉप-लॉस' खुद-ब-खुद हिट होने लगे, जिससे मजबूरन बिकवाली का ऐसा चक्र चला कि बाजार संभल ही नहीं पाया।
भारतीय बाजार (MCX) पर दिखा 'भूकंप' का असर
वैश्विक मंदी की इस लहर ने भारतीय वायदा बाजार (MCX) को भी बुरी तरह झकझोर दिया है। आज के ताजा आंकड़ों ने खरीदारों और निवेशकों को हैरान कर दिया है:
सोना (Gold): अप्रैल 2026 के वायदा अनुबंध में 8.11% की भारी गिरावट देखी गई और यह ₹1,32,767 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया।
चांदी (Silver): मई 2026 के अनुबंध में 10.72% की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई और भाव गिरकर ₹2,02,465 प्रति किलोग्राम रह गए।
बेस मेटल्स: केवल कीमती धातुएं ही नहीं, बल्कि तांबा और जस्ता जैसी औद्योगिक धातुएं भी सस्ती हुई हैं। वहीं, गोल्ड ईटीएफ (ETF) में भी 6% से 9% तक की गिरावट दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों की चिंता: क्या यह किसी बड़े संकट की आहट है?
बेंगलुरु के मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह मामूली उतार-चढ़ाव नहीं है। 2 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान इस बात का संकेत है कि किसी बड़े खिलाड़ी ने बाजार में भारी मात्रा में माल डंप किया है। अगर यह लिक्विडिटी क्राइसिस (नकदी का संकट) जारी रहा, तो इसका असर आने वाले दिनों में बैंकिंग और टेक सेक्टर पर भी पड़ सकता है। फिलहाल निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला न लें और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करें।