सुप्रीम कोर्ट: जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने सुनवाई से खुद को किया अलग; जानें क्या है 'ज्यूडिशियल रिक्यूजल' और इसकी वजह

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India News Live,Digital Desk : उच्चतम न्यायालय के जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने एक महत्वपूर्ण कानूनी मामले की सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) कर लिया है। यह घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इस मामले में पीठ ने 17 मार्च 2026 को अपनी सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित (Reserved) रख लिया था। लेकिन फैसले के एलान से पहले ही जस्टिस विश्वनाथन ने नैतिकता और निष्पक्षता के आधार पर हटने का निर्णय लिया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 'अल्केमिस्ट एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा दायर एक अपील से संबंधित था। इसकी सुनवाई जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ कर रही थी।

वजह: जस्टिस विश्वनाथन के संज्ञान में यह बात आई कि न्यायाधीश बनने से पहले, जब वह वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) थे, तब वह इसी मामले से जुड़ी 'कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया' (CIRP) में अपीलकर्ता के वकील के रूप में पेश हो चुके थे।

न्यायालय की टिप्पणी: पीठ ने स्पष्ट किया, "चूंकि न्यायमूर्ति विश्वनाथन पहले इस मामले में वकील रह चुके हैं, इसलिए उनका इस मामले में न्यायाधीश के तौर पर निर्णय देना उचित नहीं होगा।"

अगला कदम: कोर्ट ने 17 मार्च के अपने 'फैसला सुरक्षित' रखने वाले आदेश को वापस ले लिया है। अब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के निर्देशानुसार इस मामले को किसी अन्य नई पीठ के समक्ष सूचीबद्ध (List) किया जाएगा।

जस्टिस के.वी. विश्वनाथन का करियर

जस्टिस विश्वनाथन भारतीय न्यायपालिका के उन गिने-चुने न्यायाधीशों में शामिल हैं जिन्हें सीधे बार (वकालत) से पदोन्नत कर सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया है।

पदोन्नति: 19 मई, 2023 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने।

वरिष्ठता: अप्रैल 2009 में उन्हें शीर्ष अदालत ने 'वरिष्ठ अधिवक्ता' नामित किया था। न्यायाधीश बनने से पहले वह देश के सबसे प्रमुख और व्यस्ततम वकीलों में से एक थे।

क्या होता है 'रिक्यूजल' (Recusal)?

जब कोई न्यायाधीश किसी मामले की सुनवाई से खुद को हटा लेता है, तो उसे 'रिक्यूजल' कहा जाता है। इसके पीछे मुख्य रूप से 'हितों का टकराव' (Conflict of Interest) होता है।

किन स्थितियों में जज खुद को अलग करते हैं?

पिछला जुड़ाव: यदि जज वकील के तौर पर उस मामले में किसी भी पक्ष की पैरवी कर चुके हों (जैसा इस मामले में हुआ)।

व्यक्तिगत हित: यदि मामले के किसी पक्षकार से जज का पारिवारिक संबंध हो या उस कंपनी/संस्था में जज का कोई आर्थिक हित (Shares आदि) हो।

पूर्वाग्रह की संभावना: यदि जज को लगता है कि उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं, तो वह न्याय के सिद्धांत "न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए" का पालन करते हुए हट जाते हैं।