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July 28 2026 06:00 pm

मंगलवार की शाम हनुमान जी को चोला चढ़ाते समय न भूलें ये 3 नियम, वरना अधूरी रह जाएगी पूजा! जानिए सही विधि और पौराणिक कथा

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कलियुग में भगवान हनुमान को अष्टसिद्धि और नवनिधि के दाता के रूप में सबसे शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता माना जाता है। वे शक्ति, भक्ति और साहस के प्रतीक हैं। सनातन परंपरा में मंगलवार का दिन बजरंगबली की साधना और पूजा-अर्चना के लिए विशेष रूप से फलदायी माना गया है।

मान्यता है कि मंगलवार की शाम को हनुमान जी को चोला (सिंदूर और चमेली का तेल) अर्पित करने से साधक के जीवन से मंगल दोष के अशुभ प्रभाव, बीमारियां और सभी प्रकार के संकट दूर हो जाते हैं। हालांकि, कई बार भक्त अनजाने में सही नियमों का पालन किए बिना चोला चढ़ा देते हैं, जिससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

आइए जानते हैं मंगलवार की शाम चोला चढ़ाने के 3 सबसे महत्वपूर्ण नियम, सही पूजा विधि और इससे जुड़ी पौराणिक कथा।

चोला चढ़ाने से पहले जरूर जानें ये 3 मुख्य नियम

यदि आप मंगलवार की शाम को हनुमान मंदिर में या घर के मंदिर में बजरंगबली को चोला चढ़ाने जा रहे हैं, तो इन तीन नियमों का ध्यान रखना अनिवार्य है:

गंगाजल से अभिषेक अनिवार्य:

हनुमान जी को चोला चढ़ाने से पूर्व उनकी प्रतिमा का गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक (स्नान) अवश्य करें। बिना अभिषेक किए प्रतिमा पर चोला चढ़ाना अधूरा माना जाता है।

चमेली के तेल का प्रयोग (सूखा सिंदूर न चढ़ाएं):

सिंदूर कभी भी सूखा नहीं चढ़ाना चाहिए। चोले के लिए हमेशा लाल या नारंगी सिंदूर को चमेली के तेल (Jasmine Oil) में अच्छी तरह मिलाकर ही लेप तैयार करना चाहिए। चमेली का तेल हनुमान जी को अत्यंत प्रिय है।

चरणों से शुरुआत कर ऊपर की ओर जाएं:

चोला चढ़ाते समय हमेशा सबसे पहले हनुमान जी के चरणों में सिंदूर अर्पित करें। इसके बाद नीचे से ऊपर की ओर बढ़ते हुए पूरे शरीर पर लेप लगाएं।

पौराणिक कथा: क्यों चढ़ाया जाता है हनुमान जी को सिंदूर?

रामायण काल की एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, एक बार हनुमान जी ने माता सीता को अपनी मांग में सिंदूर लगाते देखा। जब उन्होंने उत्सुकता से इसका कारण पूछा, तो माता सीता ने कहा कि प्रभु श्रीराम की दीर्घायु और प्रसन्नता के लिए वे सिंदूर लगाती हैं।

हनुमान जी ने सोचा कि यदि चुटकी भर सिंदूर से प्रभु श्रीराम इतने प्रसन्न होते हैं, तो क्यों न मैं अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लूं। उन्होंने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। हनुमान जी की इस निश्छल भक्ति और समर्पण को देखकर भगवान श्रीराम अत्यंत प्रसन्न हुए। तभी से हनुमान जी को चोला चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।

मंगलवार की शाम चोला चढ़ाने की सही पूजा विधि

चरणपूजा विधि और सामग्री
1. तैयारीशाम के समय स्नान कर साफ/सात्विक वस्त्र (संभव हो तो लाल या पीले) धारण करें।
2. अभिषेक व लेपप्रतिमा को गंगाजल से स्वच्छ करें। चमेली के तेल और नारंगी सिंदूर का लेप तैयार कर चरणों से शुरू करते हुए चोला चढ़ाएं।
3. श्रृंगारचोला चढ़ाने के बाद चांदी का वर्क, नया जनेऊ और साफ वस्त्र (लंगोट/दुपट्टा) अर्पित करें।
4. राम नाम की माला21 पीपल के पत्तों पर चंदन से 'राम' नाम लिखकर माला बनाएं और हनुमान जी को पहनाएं।
5. भोग व आरतीगुड़, चना, बेसन के लड्डू, पान का बीड़ा और सुपारी का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें।

पूजा के बाद रखें इन बातों का ध्यान

चोला चढ़ाने और आरती संपन्न होने के बाद हनुमान जी के सामने अपनी मनोकामनाएं मन ही मन दोहराएं।

घर आकर केवल सात्विक भोजन ग्रहण करें।

मंगलवार के दिन क्रोध, झूठ, और किसी के प्रति मन में गलत विचार लाने से बचें।

नियमित रूप से यह उपाय करने से जीवन में साहस, धन-समृद्धि और मानसिक शांति का आगमन होता है।