8वां वेतन आयोग: 3 के बजाय 5 सदस्यों वाला नया फॉर्मूला, जानें कैसे ₹69,000 हो जाएगा न्यूनतम वेतन
India News Live,Digital Desk : केंद्र सरकार के करीब 48 लाख कर्मचारियों और 67 लाख पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन की चर्चाओं के बीच कर्मचारी यूनियनों ने वेतन गणना के पुराने फॉर्मूले को बदलने की जोरदार मांग की है। अब तक वेतन की गणना '3 सदस्यों' के परिवार के आधार पर की जाती थी, जिसे बढ़ाकर अब '5 सदस्यों' के आधार पर करने का प्रस्ताव दिया गया है। यदि यह मांग स्वीकार कर ली जाती है, तो सरकारी कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन में ऐतिहासिक उछाल देखने को मिल सकता है।
क्या है 5 सदस्यों वाला नया फॉर्मूला?
अब तक न्यूनतम वेतन का निर्धारण कर्मचारी, उसके जीवनसाथी और दो बच्चों (आधी इकाई मानकर) के आधार पर होता था। लेकिन एनसी-जेसीएम (NC-JCM) ने तर्क दिया है कि भारतीय सामाजिक परिवेश में कर्मचारी अपने बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी भी उठाता है।
नई प्रस्तावित इकाइयाँ:
स्वयं कर्मचारी: 1 इकाई
जीवनसाथी: 1 इकाई
दो बच्चे: 1.6 इकाई (प्रत्येक बच्चा 0.8)
आश्रित माता-पिता: 1.6 इकाई (प्रत्येक माता-पिता 0.8)
कुल: 5.2 इकाइयाँ (जिसे राउंड फिगर में 5 माना गया है)
न्यूनतम वेतन ₹69,000 करने की मांग
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान महंगाई और जीवन स्तर को देखते हुए 3 सदस्यों वाला फॉर्मूला अब प्रासंगिक नहीं रह गया है। 5 सदस्यों के फॉर्मूले के आधार पर भोजन, आवास, बच्चों की शिक्षा और माता-पिता के स्वास्थ्य खर्च को जोड़कर न्यूनतम वेतन को ₹69,000 तय करने का ज्ञापन सौंपा गया है। वर्तमान में (7वें वेतन आयोग के तहत) न्यूनतम वेतन ₹18,000 है।
खर्चों का नया गणित (Proposed Expenditure Model)
इस नए फॉर्मूले में केवल दाल-रोटी नहीं, बल्कि आधुनिक जरूरतों को भी शामिल किया गया है:
भोजन और पोषण: संतुलित आहार की लागत।
आवास: कुल खर्च का 7.5% हिस्सा घर के किराए के लिए।
शिक्षा और कौशल: बच्चों की पढ़ाई के लिए 25% का वेटेज।
सामाजिक दायित्व: शादी-ब्याह और त्योहारों के लिए 25% हिस्सा।
डिजिटल जरूरतें: मोबाइल, इंटरनेट और तकनीक के लिए 5% अतिरिक्त।
माता-पिता का कानूनी अधिकार और सामाजिक सुरक्षा
ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया गया है कि 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण अधिनियम' के तहत बुजुर्गों की देखभाल करना कर्मचारी का कानूनी कर्तव्य है। साथ ही, 'सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020' भी परिवार की परिभाषा में आश्रित माता-पिता को शामिल करती है। ऐसे में वेतन गणना में उन्हें नजरअंदाज करना तर्कसंगत नहीं है।