परेश रावल का बेटा होने पर क्या आदित्य रावल को महसूस होता है 'दबाव'? 'सूबेदार' एक्टर ने पिता की विरासत पर तोड़ी चुप्पी...

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India News Live,Digital Desk : बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और अपनी बेमिसाल कॉमिक टाइमिंग व संजीदा अभिनय के लिए मशहूर परेश रावल के बेटे आदित्य रावल इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म 'सूबेदार' (Subedaar) को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। अभिनय की दुनिया में अपने पिता के नक्शेकदम पर चल रहे आदित्य से अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या एक दिग्गज कलाकार का बेटा होने के नाते उन पर कोई मानसिक दबाव रहता है? हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान आदित्य ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की और खुलासा किया कि वह अपने पिता की महान विरासत और दर्शकों की उम्मीदों को किस नजरिए से देखते हैं।

'बाबू भैया' की विरासत और बेटे का संघर्ष

आदित्य रावल ने बताया कि वह सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें परेश रावल जैसे मंझे हुए कलाकार का मार्गदर्शन प्राप्त है। 'सूबेदार' में अपने दमदार अभिनय से छाप छोड़ने वाले आदित्य ने साफ किया कि वह प्रेशर महसूस करने के बजाय इसे एक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं। उन्होंने कहा, "जब आपके पिता परेश रावल हों, तो तुलना होना स्वाभाविक है, लेकिन मेरा ध्यान केवल अपने काम की गुणवत्ता और सीखने की प्रक्रिया पर रहता है।" आदित्य के मुताबिक, उनके पिता ने हमेशा उन्हें अपनी पहचान खुद बनाने और जमीन से जुड़े रहने की सीख दी है।

'सूबेदार' में दिखा आदित्य का अलग अवतार

अनिल कपूर अभिनीत फिल्म 'सूबेदार' में आदित्य रावल ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसे दर्शकों और समीक्षकों की काफी सराहना मिल रही है। इस फिल्म में उनकी परफॉर्मेंस ने यह साबित कर दिया है कि वह केवल 'नेपो किड' के टैग के साथ नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा के दम पर इंडस्ट्री में पैर जमाने आए हैं। आदित्य ने साझा किया कि 'सूबेदार' की तैयारी के दौरान उन्होंने काफी मेहनत की ताकि वह किरदार के साथ न्याय कर सकें और लोगों को यह दिखा सकें कि वह हर तरह के चुनौतीपूर्ण किरदारों के लिए तैयार हैं।

नेपोटिज्म और उम्मीदों के बोझ पर बेबाक राय

इंटरव्यू के दौरान जब नेपोटिज्म और स्टार किड्स पर होने वाली चर्चाओं का जिक्र हुआ, तो आदित्य ने बड़ी सादगी से जवाब दिया। उन्होंने माना कि इंडस्ट्री में शुरुआती मौका मिलना आसान हो सकता है, लेकिन कैमरे के सामने आपकी मेहनत ही बोलती है। आदित्य ने कहा कि पिता की शोहरत से उन्हें प्रेरणा मिलती है, बोझ नहीं। वह चाहते हैं कि आने वाले समय में लोग उन्हें उनके काम से पहचानें और वह परेश रावल के नाम को और आगे ले जा सकें।