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September 03 2026 12:42 am

Dhanteras 2025 : शनि त्रयोदशी पर करें ये पूजा और व्रत, मिलेगा सुख और समृद्धि

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India News Live,Digital Desk : दीवाली महापर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन धन के देवता कुबेर, आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि, और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। इस साल 2025 में धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर, शनिवार को मनाया जा रहा है। जब कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि शनिवार के दिन आती है, तो इसे शनि त्रयोदशी या शनि प्रदोष कहते हैं।

इस दुर्लभ संयोग में किए गए व्रत और पूजा से धन, स्वास्थ्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन प्रदोष व्रत की कथा और आरती का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है।

प्रदोष व्रत की कथा

हिंदू पुराणों के अनुसार, अंबापुर नामक गांव में एक विधवा ब्राह्मणी रहती थी। अपने पति के निधन के बाद वह भिक्षा मांगकर जीवन यापन कर रही थी। एक दिन भिक्षा मांगते समय उसे दो छोटे अनाथ बच्चे मिले। वह बच्चों को अपने साथ ले आई और उनका पालन-पोषण किया।

कुछ वर्षों बाद, ब्राह्मणी बच्चों को लेकर ऋषि शांडिल्य के पास गई और जानना चाहा कि बच्चों के माता-पिता कौन हैं। ऋषि ने बताया कि ये दोनों बच्चे विदर्भ नरेश के राजकुमार हैं, जो गंदर्भ नरेश के आक्रमण के कारण अपने राज्य से विस्थापित हो गए थे।

ब्राह्मणी ने राज्य वापस पाने का उपाय पूछा। तब ऋषि शांडिल्य ने प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। ब्राह्मणी और दोनों राजकुमारों ने इस व्रत को श्रद्धा और भक्ति के साथ किया।

कुछ समय बाद, राजकुमारों की मुलाकात अंशुमती से हुई और वे विवाह के लिए सहमत हो गए। अंशुमती के पिता की मदद से गंदर्भ नरेश के खिलाफ युद्ध हुआ और राजकुमारों को राज्य पुनः प्राप्त हुआ। प्रसन्न होकर राजकुमारों ने ब्राह्मणी को सम्मानित किया और वह भोलेनाथ की बड़ी उपासक बन गई।

शिवजी की आरती

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।  
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥  

ॐ जय शिव ओंकारा...  
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।  
हंसासन गरूड़ासन, वृषवाहन साजे ॥  

ॐ जय शिव ओंकारा...  
दो भुज चार चतुर्भुज, दसभुज अति सोहे।  
त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे ॥  

ॐ जय शिव ओंकारा...  
अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी।  
चंदन मृगमद सोहै, भाले शशिधारी ॥  

ॐ जय शिव ओंकारा...  
श्वेताम्बर पीताम्बर, बाघम्बर अंगे।  
सनकादिक गरुणादिक, भूतादिक संगे ॥  

ॐ जय शिव ओंकारा...  
कर के मध्य कमंडल, चक्र त्रिशूलधारी।  
सुखकारी दुखहारी, जगपालन कारी॥  

ॐ जय शिव ओंकारा...  
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका।  
प्रणवाक्षर में शोभित, ये तीनों एका ॥  

ॐ जय शिव ओंकारा...  
त्रिगुणस्वामी जी की आरति, जो कोइ नर गावे।  
कहत शिवानंद स्वाम, सुख संपति पावे ॥  
 

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